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विश्व रेबीज दिवस: जम्मू कश्मीर के नौ जिलों में सिरम के लिए दरबदर हो रहे मरीज
Wed, 28 Sep 2022 12:03 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Wed, 28 Sep 2022 12:03 PM IST
सार
एंटी रेबिज वैक्सीन 7 से 10 दिन के भीतर मानव शरीर में एंटी रेबिज एंटीबाडीज बनाती है। सिरम और वैक्सीन देने की प्रक्रिया को सीरवैक्सीनेशन कहा जाता है। रेबिज वायरस मानव शरीर में पहुंचकर नसों के माध्यम से आखिर में दिमाग पर हमला करता है।
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(सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Social Media
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विस्तार
स्वास्थ्य विभाग भले ही बुनियादी ढांचे के साथ चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करने के दावे कर रहा है, लेकिन अभी भी कई मामलों में मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। जीएमसी जम्मू को छोड़कर कहीं भी एंटी रेबिज सेक्शन में सिरम की उपलब्धता न होने से संभाग के नौ जिलों में मरीजों को दरबदर होना पड़ रहा है।
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किसी जानवर खासतौर पर कुत्ते के काटने पर क्लास तीन में खून का रिसाव होने पर सिरम के साथ एंटी रेबिज वैक्सीन दी जाती है, लेकिन जिला स्तर पर सिरम न होने से मरीजों को बाजार या फिर जीएमसी जम्मू पर निर्भर रहना पड़ता है। इसमें भी पीड़ित को बाजार से सिरम की एक वायल 400 से 500 रुपये में मिलती है।
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किसी जानवर के काटने पर पीड़ित को एंटी रेबिज वैक्सीन के साथ सिरम देना जरूरी होता है। सिरम को बाइट वाले स्थान पर लगाया जाता है ताकि वह रेबिज वायरस को नसों के माध्यम से दिमाग तक जाने से रोकता है। यह चौबीस घंटे के भीतर वायरस को शरीर में एक जगह पर फिक्स कर देता है, ताकि वह आगे न बढ़ सके। मजेदार बात यह है कि संभाग में जिला डोडा, कठुआ और राजोरी में मेडिकल कॉलेज भी काम कर रहे हैं, लेकिन जिला स्तर पर कहीं भी सिरम की उपलब्धता नहीं है।
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एंटी रेबिज वैक्सीन 7 से 10 दिन के भीतर मानव शरीर में एंटी रेबिज एंटीबाडीज बनाती है। सिरम और वैक्सीन देने की प्रक्रिया को सीरवैक्सीनेशन कहा जाता है। रेबिज वायरस मानव शरीर में पहुंचकर नसों के माध्यम से आखिर में दिमाग पर हमला करता है, जिससे अधिकांश पीड़ितों की मौत हो जाती है। जीएमसी जम्मू में सिरम को देने से पहले 30 मिनट की टेस्ट डोज दी जाती है, ताकि पीड़ित को किसी तरह से रिएक्शन से बचाया जा सके। जीएमसी के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. राजीव गुप्ता का कहना है कि क्लास तीन के जानवर काटने के मामलों में वैक्सीन के साथ सिरम की भूमिका अहम होती है।
जीएमसी में मासिक 800 से 900 डाग बाइट के मामले आ रहे
जम्मू। जीएमसी की एंटी रेबिज सेक्शन में दैनिक आधार पर 70 से 90 और मासिक आधार पर 800 से 900 एनिमल बाइट के मामले आ रहे हैं। जिसमें 95 प्रतिशत तक मामले डाग बाइट के हैं। जीएमसी के आंकड़ों के मुताबिक रेबिज सेक्शन में 2019 में 10952 मामले आए, जिसमें 5 रेबिज पीड़ितों की मौत हुई। कोविड के दौरान वर्ष 2020 में 6204, वर्ष 2021 में 6212 मामले आए और 3 रेबिज मरीजों की मौत हुई। इस साल अब तक छह हजार के करीब मामले आ चुके हैं, जिनमें अधिकांश डाग बाइट के मामले हैं। डाग बाइट के मामलों में खासतौर पर जिला जम्मू अधिक प्रभावित है। शहर और आसपास के इलाकों से अधिकांश मामले पहुंच रहे हैं।
सप्लाई के लिए जेकेएमएससी को लिखा- निदेशक
स्वास्थ्य निदेशक जम्मू डॉ. सलीम उर रहमान का कहना है कि जिला स्तर पर सिरम की उपलब्धता के लिए जम्मू-कश्मीर मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन (जेकेएमएससी) को लिखा है। उम्मीद है कि जल्द ही सभी जिला अस्पतालों में पीड़ितों को सिरम मिलना शुरू हो जाएगी।