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Jammu News: दादा-दादी के पास बच्चे छोड़े, खुद हेरोइन के नशे में डूबे
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। कुछ माह में साइकाइटरी अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र की ओपीडी में 35 प्रतिशत मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई हैं। जनवरी में 500 मरीज पहुंचे, जो अप्रैल में बढ़कर 750 हो गए। अधिकांश हेरोइन के नशे से पीड़ित हैं। नए मामलों में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अब युवकों के साथ युवतियां और दंपत्तियां भी महंगे नशे की लत में फंस रही हैं। कई युवतियां नशे की समस्याएं लेकर आ रही हैं। हालांकि सामाजिक बदनामी के चलते अधिकांश युवतियां निजी डॉक्टरों के पास इलाज करवा रही हैं। अस्पताल में ऐसे मामले भी आ रहे हैं, जिसमें दादा-दादी के पास बच्चों को छोड़कर दंपत्ति नशे की दलदल में फंस गया।
केंद्र में 16 से 30 साल के आयु वर्ग के युवा अधिक रिपोर्ट हो रहे हैं। अन्य नशों में 20 से 30 प्रतिशत पीड़ित हेरोइन की लत छुड़वाने का इलाज करवा रहे हैं। इसमें बड़ी संख्या युवाओं की है। इसके अलावा निजी क्लीनिकों में भी ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। वहीं, अस्पताल के ओपिड सब्सिट्यूट थेरेपी (ओएसटी) केंद्र में 970 मरीज पंजीकृत हो चुके हैं, जिसमें 90 प्रतिशत से अधिक हेरोइन की लत से परेशान हैं।
एक माह तक भर्ती रही 25 साल की विवाहिता
केस 1 - साइकाइटरी अस्पताल में हाल ही में विवाहिता (25) को एक माह तक भर्ती रखा गया। पता चला कि पहले पति को हेरोइन की लत थी, जिसके बाद उसने पत्नी को भी आदत डाल दी और दोनों लंबे समय से हेरोइन का नशा कर रहे हैं। जब पैसे की तंगी आई और स्वास्थ्य बिगड़ने लगा, तो दंपत्ति ने बच्चों को दादा-दादी के पास छोड़ा और खुद नशे के लिए जुगाड़ लगाने लगे। इस दौरान पत्नी की हालत अधिक बिगड़ गई। इस कारण इलाज करवाना पड़ा
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दोस्तों की खराब संगत का शिकार बन गई युवती
केस 2 - नगरोटा से युवती (27) को साथियों की संगत से हेरोइन की लत लग गई। इसके बाद वह धीरे-धीरे नशे का शिकार बन गई। शुरुआत में रोजाना 5000-6000 खर्च आने लगा, लेकिन लत बढ़ने पर खर्च भी बढ़ता चला गया और आखिर में पैसे खत्म होने के साथ सेहत बिगड़ गई, जिसके बाद साइकाइटरी अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।
शारीरिक समस्याएं- डोज न लेने पर जबरदस्त दर्द, शरीर का टूटना, नाक और मुंह से पानी बहना, कमजोरी महसूस होना।
लक्षण - बाथरूम में सिरिंज व अन्य नशे की दवाइयों का मिलना, देरी से उठना, चिड़चिड़ापन, पीड़ित का परिवार से दूरी बनाना, खाना कम, व्यवहार में बदलाव।
बचाव - अभिभावक बच्चों की गतिविधियों पर नियमित ध्यान दें। नशीले पदार्थों की मांग को गंभीरता से लें। बिना वजह पैसे की मांग को नजरअंदाज न करें।
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जम्मू। कुछ माह में साइकाइटरी अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र की ओपीडी में 35 प्रतिशत मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई हैं। जनवरी में 500 मरीज पहुंचे, जो अप्रैल में बढ़कर 750 हो गए। अधिकांश हेरोइन के नशे से पीड़ित हैं। नए मामलों में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अब युवकों के साथ युवतियां और दंपत्तियां भी महंगे नशे की लत में फंस रही हैं। कई युवतियां नशे की समस्याएं लेकर आ रही हैं। हालांकि सामाजिक बदनामी के चलते अधिकांश युवतियां निजी डॉक्टरों के पास इलाज करवा रही हैं। अस्पताल में ऐसे मामले भी आ रहे हैं, जिसमें दादा-दादी के पास बच्चों को छोड़कर दंपत्ति नशे की दलदल में फंस गया।
केंद्र में 16 से 30 साल के आयु वर्ग के युवा अधिक रिपोर्ट हो रहे हैं। अन्य नशों में 20 से 30 प्रतिशत पीड़ित हेरोइन की लत छुड़वाने का इलाज करवा रहे हैं। इसमें बड़ी संख्या युवाओं की है। इसके अलावा निजी क्लीनिकों में भी ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। वहीं, अस्पताल के ओपिड सब्सिट्यूट थेरेपी (ओएसटी) केंद्र में 970 मरीज पंजीकृत हो चुके हैं, जिसमें 90 प्रतिशत से अधिक हेरोइन की लत से परेशान हैं।
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एक माह तक भर्ती रही 25 साल की विवाहिता
केस 1 - साइकाइटरी अस्पताल में हाल ही में विवाहिता (25) को एक माह तक भर्ती रखा गया। पता चला कि पहले पति को हेरोइन की लत थी, जिसके बाद उसने पत्नी को भी आदत डाल दी और दोनों लंबे समय से हेरोइन का नशा कर रहे हैं। जब पैसे की तंगी आई और स्वास्थ्य बिगड़ने लगा, तो दंपत्ति ने बच्चों को दादा-दादी के पास छोड़ा और खुद नशे के लिए जुगाड़ लगाने लगे। इस दौरान पत्नी की हालत अधिक बिगड़ गई। इस कारण इलाज करवाना पड़ा
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दोस्तों की खराब संगत का शिकार बन गई युवती
केस 2 - नगरोटा से युवती (27) को साथियों की संगत से हेरोइन की लत लग गई। इसके बाद वह धीरे-धीरे नशे का शिकार बन गई। शुरुआत में रोजाना 5000-6000 खर्च आने लगा, लेकिन लत बढ़ने पर खर्च भी बढ़ता चला गया और आखिर में पैसे खत्म होने के साथ सेहत बिगड़ गई, जिसके बाद साइकाइटरी अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।
शारीरिक समस्याएं- डोज न लेने पर जबरदस्त दर्द, शरीर का टूटना, नाक और मुंह से पानी बहना, कमजोरी महसूस होना।
लक्षण - बाथरूम में सिरिंज व अन्य नशे की दवाइयों का मिलना, देरी से उठना, चिड़चिड़ापन, पीड़ित का परिवार से दूरी बनाना, खाना कम, व्यवहार में बदलाव।
बचाव - अभिभावक बच्चों की गतिविधियों पर नियमित ध्यान दें। नशीले पदार्थों की मांग को गंभीरता से लें। बिना वजह पैसे की मांग को नजरअंदाज न करें।