अब महिलाएं करेंगी पर्यटकों की खातिरदारी
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लद्दाख खित्ते में आने वाले पर्यटकों की खातिरदारी की कमान महिलाओं ने संभाली है। लद्दाख नेशनल पार्क के अधीन आने वाले अधिकतर गांव में वूमेन सेल्फ हेल्प ग्रुप तैयार किए गए हैं। वन विभाग ने इन महिलाओं के सहयोग से इको कैफे भी बनाए हैं। यहां आने वाले पर्यटक रुक सकते हैं, आराम कर सकते हैं।
यही नहीं, नेशनल पार्क में आने वाले ट्रैकरों के लिए भी यह सुविधा विशेष रूप से रहेगी। पार्क के ट्रैकिंग रूट के किनारे यह कै फे बनाए गए हैं। यहां पर्यटकों को महिलाओं के खुद तैयार किए गए उत्पाद, खाने-पीने की सुविधाएं मिलेंगी। इसमें खासतौर पर लद्दाख के पारंपरिक व्यंजनों को शामिल किया गया है।
जो पौष्टिक और जैविक हैं। विदेशी पर्यटकों को खास ध्यान में रखकर महिलाएं इनको तैयार करेंगी। वन विभाग ने इन महिलाओं की ओर से तैयार किए गए उत्पादों के लिए लेह मार्केट में मार्केटिंग सेंटर भी खोला है। यहां हथकरघा और हैंडलूम के उत्पाद मिलेंगे। लद्दाख में विदेशी और घरेलू पर्यटकों की आमद बढ़ाने की दिशा में यह कदम उठाया गया है। करीब 500 इको कैफे खोले गए हैं।
प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड के तहत शामिल की गई
लद्दाख के चीफ कंजरवेटर आफ फारेस्ट और क्षेत्रीय वन्यजीव अधिकारी, जिगमेत तपका का कहना है कि प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड के तहत इन महिलाओं को अपने साथ जोड़ा गया है। स्नो लेपर्ड पर अधिक से अधिक रिसर्च हो। स्नो लेपर्ड को देखने के लिए अधिक से पर्यटक पहुंचें, क्योंकि दुनिया में लद्दाख ही एकमात्र ऐसा क्षेत्र है, जहां स्नो लेपर्ड को पांच फुट की दूरी पर भी देखा जा सकता है।
सेव स्नो लेपर्ड प्रोजेक्ट शुरू
मौजूदा समय में विश्व में करीब छह हजार स्नो लेपर्ड हैं। भारत के सिक्किम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, अरुणांचल प्रदेश और लद्दाख में एक हजार लेपर्ड हैं। इनमें से 600 लद्दाख में है। सेव टाइगर, सेव एलिफेंट की तरह सेव स्नो लेपर्ड प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।