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जम्मू-कश्मीर में पड़ोसियों और साथियों से महफूज नहीं हैं महिलाएं, हर साल 250 दुष्कर्म का शिकार
Sun, 09 Feb 2020 10:01 AM IST
Pranjal Dixit
सतीश वालिया, अमर उजाला, जम्मू
सतीश वालिया, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Sun, 09 Feb 2020 10:01 AM IST
सार
- प्रदेश में सेफ नहीं हैं महिलाएं, रिश्तेदार, पड़ोसी, पार्टनर के खिलाफ भी दर्ज हुए मामले
- सरकारी कर्मचारियों ने भी लगाया है दुराचार का आरोप
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सांकेतिक
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विस्तार
कड़ी कानून व्यवस्था के बाद भी जम्मू कश्मीर में हर साल 250 से ज्यादा महिलाएं दुष्कर्म का शिकार हो रही हैं। पड़ोसियों और पार्टनरों से भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। 2019 में पड़ोसियों द्वारा ही महिलाओं से 60 से ज्यादा दुष्कर्म के मामले दर्ज किए गए। वहीं बड़ी संख्या पार्टनरों द्वारा भी शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के मामले सामने आए हैं। पुलिस विभाग की ओर से मिले आकड़े इसकी पुष्टि करते हैं।
जम्मू-कश्मीर में दुष्कर्म के साथ ही छेड़छाड़ के मामलों में भी बढ़ोतरी आई है। अपराध के इस ग्राफ से अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश में महिलाएं कितनी सुरक्षित हैं। पुलिस विभाग से लिए गए आकड़ों के मुताबिक हर साल प्रदेश के विभिन्न जिलों में 200 से 300 के बीच महिलाओं से दुराचार के मामले दर्ज किए गए हैं। कहीं पर रिश्तेदारों ने महिलाओं से दुराचार किया तो कहीं पर पड़ोसी पर दुष्कर्म का आरोप लगा। पार्टनरों द्वारा शादी का झांसा देकर युवतियों से दुष्कर्म करने के मामले भी दर्ज किए गए।
सरकारी कर्मचारियों ने भी लगाया है दुराचार का आरोप
हर साल सरकारी कर्मचारियों से दुराचार होने पर तीन से पांच मामले दर्ज किए गए हैं। महिलाओं के साथ उत्पीड़न होने के बाद शिकायत थानों में दर्ज करवाई गई। अकेली महिलाओं से भी हर साल 30 से 50 मामले दुराचार होने पर दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा पड़ोसियों द्वारा महिला से दुराचार के 50 से 80 मामले हर साल दर्ज किए गए। इतना ही नहीं महिलाओं के पार्टनरों ने भी धोखा दिया। हर साल 3 से 6 मामले पार्टनरों के खिलाफ दर्ज किए गए हैं।
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जम्मू-कश्मीर में दुष्कर्म के साथ ही छेड़छाड़ के मामलों में भी बढ़ोतरी आई है। अपराध के इस ग्राफ से अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश में महिलाएं कितनी सुरक्षित हैं। पुलिस विभाग से लिए गए आकड़ों के मुताबिक हर साल प्रदेश के विभिन्न जिलों में 200 से 300 के बीच महिलाओं से दुराचार के मामले दर्ज किए गए हैं। कहीं पर रिश्तेदारों ने महिलाओं से दुराचार किया तो कहीं पर पड़ोसी पर दुष्कर्म का आरोप लगा। पार्टनरों द्वारा शादी का झांसा देकर युवतियों से दुष्कर्म करने के मामले भी दर्ज किए गए।
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सरकारी कर्मचारियों ने भी लगाया है दुराचार का आरोप
हर साल सरकारी कर्मचारियों से दुराचार होने पर तीन से पांच मामले दर्ज किए गए हैं। महिलाओं के साथ उत्पीड़न होने के बाद शिकायत थानों में दर्ज करवाई गई। अकेली महिलाओं से भी हर साल 30 से 50 मामले दुराचार होने पर दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा पड़ोसियों द्वारा महिला से दुराचार के 50 से 80 मामले हर साल दर्ज किए गए। इतना ही नहीं महिलाओं के पार्टनरों ने भी धोखा दिया। हर साल 3 से 6 मामले पार्टनरों के खिलाफ दर्ज किए गए हैं।
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हर साल इतने मामले हुए दर्ज
वर्ष मामले
2011 277
2012 303
2013 378
2014 166
2015 296
2016 260
2017 312
2018 259
2019 248
2014 में सबसे कम तो 2013 में सबसे ज्यादा मामले दर्ज
बीते दस वर्षों की बात करें तो प्रदेश में 2014 में महिलाओं से दुष्कर्म के सबसे कम मामले दर्ज किए गए। इस वर्ष 166 केस दर्ज हुए। वहीं इससे पहले के वर्ष 2013 में सबसे ज्यादा 378 केस विभिन्न थानों में आए। 2019 में 248 मामले दर्ज किए गए।
वर्ष मामले
2011 277
2012 303
2013 378
2014 166
2015 296
2016 260
2017 312
2018 259
2019 248
2014 में सबसे कम तो 2013 में सबसे ज्यादा मामले दर्ज
बीते दस वर्षों की बात करें तो प्रदेश में 2014 में महिलाओं से दुष्कर्म के सबसे कम मामले दर्ज किए गए। इस वर्ष 166 केस दर्ज हुए। वहीं इससे पहले के वर्ष 2013 में सबसे ज्यादा 378 केस विभिन्न थानों में आए। 2019 में 248 मामले दर्ज किए गए।
महिलाओं को सुरक्षा देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इसमें मोबाइल नंबर और पुलिस वैन सुविधा भी महिलाओं को ऑन काल ही मुहैया करवाई गई है। महिलाओं से दुराचार मामलों में गिरावट लाने के लिए सख्ती से पुलिस विभाग कार्रवाई कर रहा है।-विवेक गुप्ता, डीआईजी