वाइन शाप-बार को भी नई सरकार का इंतजार
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पिछले छह साल से वाइन शाप और बार का लाइसेंस लेने वालों का इंतजार इस साल भी खत्म होता नजर नहीं आ रहा। एनसी और कांग्रेस सरकार के दौरान छह साल पहले इन लाइसेंसों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, जो अभी तक जारी है। छह साल बाद राज्य में एक नई सरकार का गठन होने जा रहा था।
ऐसे में लाइसेंस लेने वालों में उम्मीद जगी थी कि शायद नई सरकार के गठन होने पर 31 मार्च को बनने वाली एक्साइज पॉलिसी में इस पर लगा प्रतिबंध हट जाए और लाइसेंस जारी होने का रास्ता साफ हो जाए, लेकिन राज्यपाल शासन लगने से अब उम्मीदें पूरी होती नजर नहीं आ रहीं।
जानकारी के अनुसार छह साल पहले लाइसेंस आवंटन में हेराफेरी की शिकायतों पर लाइसेंसों के जारी होने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। किसी को भी बार और वाइन शाप का लाइसेंस नहीं मिला। पिछले छह साल में लगातार सरकार की तरफ से हर वर्ष एक्साइज पॉलिसी तो बनी, लेकिन इस पर प्रतिबंध नहीं हटा।
छह साल से लगा हुआ है प्रतिबंध
इस बार उम्मीद की जा रही थी कि नई सरकार के गठन होने पर यह प्रतिबंध हट जाएगा, लेकिन सरकार का गठन नहीं हुआ। हालांकि एक्साइज पॉलिसी इस साल भी बनेगी। इस पर काम भी शुरू किया गया है। राज्यपाल शासन में एक्साइज पॉलिसी तैयार होगी, लेकिन इसमें इस पर लगे प्रतिबंध के हटने के आसार नहीं हैं।
राज्य आबकारी विभाग की एग्जीक्यूटिव उपायुक्त अनुराधा गुप्ता ने बताया कि लाइसेंस जारी करना या न करना सरकार तय करती है। हर वर्ष इसे लेकर एक्साइज पॉलिसी तैयार की जाती है। सरकार ही यह पॉलिसी बनाती है। इसी में एक्साइज ड्यूटी तय की जाती है।
1 अप्रैल से नई पॉलिसी लागू हो जाएगी। लाइसेंस से प्रतिबंध हटेगा या नहीं सरकार तय करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यपाल शासन में भी पॉलिसी बनेगी और प्रभावी ढंग से लागू होगी। एक अनुमान के अनुसार हर साल 100 के करीब लोग बार और वाइन शाप के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन मंजूरी किसी को नहीं मिलती।