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...जब नवाज शरीफ बोले वाजपेयी साहब पाकिस्तान में भी जीत सकते हैं चुनाव

Fri, 17 Aug 2018 12:37 AM IST
प्रांजल दीक्षित, अमर उजाला, जम्मू
प्रांजल दीक्षित, अमर उजाला, जम्मू Updated Fri, 17 Aug 2018 12:37 AM IST
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When Nawaz Sharif said atal bihari Vajpayee can now win an election in even Pakistan
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भारत-पाक रिश्तों में आई तब्दीलियों के लिए जाना जाता है। साल 1999 में सरकार बनने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी दो दिवसीय (19-20 फरवरी) दौरे पर पाकिस्तान गए थे। तब उन्होंने दिल्ली-लाहौर बस सेवा शुरू करते हुए बस में लाहौर यात्रा की थी। 
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सर्विस का शुभारंभ करते हुए फर्स्ट पैसेंजर के तौर पर वाजपेयी पाकिस्तान की विजिट पर पहुंचे थे। बता दें कि भारत-पाकिस्तान सीमा पर वाघा में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने वाजपेयी का स्वागत किया था। यहां उन्होंने पाकिस्तान के तत्कालीन पीएम नवाज शरीफ से मुलाकात कर आपसी संबंधों की नई शुरुआत की थी।
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इस यात्रा के दौरान ही नवाज शरीफ ने कहा था कि वाजपेयी पाकिस्तान से भी चुनाव जीत सकते हैं। इस बात का जिक्र वरिष्ठ पत्रकार किंगशुक नाग की पुस्तक अटल बिहारी वाजपेयी: ए मैन फॉर ऑल सीजन में किया गया है। वाजपेयी के साथ 22 लोगों का दल भी गया था जिसमें फिल्म अभिनेता देवा आनंद सहित लेखक जावेद अख्तर गए थे। जिस बस से अटल जी लाहौर गए थे, बाद में उसे दिल्ली-लाहौर के बीच चलाया गया। 
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जब वाजपेयी बॉर्डर पार करके पाकिस्तान पहुंचे, तो नवाज शरीफ ने उनका जोरदार स्वागत किया। उन्होंने कहा, "यह दक्षिण एशिया के इतिहास का सबसे निर्णायक क्षण है और हमे चुनौतियों से निपटना होगा।" अटल के सहयोगी सुधींद्र कुलकर्णी ने बाद में इस घटना को याद करते हुए बताया था कि कैसे पाकिस्तान के सूचना मंत्री मोहम्मद हुसैन ने उनसे कहा था, 'पाकिस्तान में इस समय आने का साहस केवल वाजपेयी ही कर सकते थे।" लाहौर प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें दोनों देशों ने शांतिपूर्ण संबंधों पर बल देने की बात कही थी। इस बस सेवा के शुरू हो जाने के बाद दोनों मुल्कों के लोग अपने-अपने परिवारों से मिलने के लिए आने-जाने लगे।   

वाजपेयी ही थे जिन्होंने परमाणु परीक्षण का शुरू से ही समर्थन किया और 1998 में पांच टेस्ट कर अमेरिका समेत पाकिस्तान को रातों-रात चौंका दिया था। इस दौरान दोनों देशों के बीच लाहौर घोषणापत्र नामक द्विपक्षीय समझौता भी हुआ था, लेकिन कुछ महीने बाद ही पाकिस्तानी घुसपैठ के कारण भारत ने करगिल युद्ध लड़ा था। 

कारगिल की जंग के दौरान भी ये बस सर्विस जारी थी। हालांकि, 2001 में पार्लियामेंट अटैक के बाद इसे रोक दिया गया था। 16 जुलाई 2003 में द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के बाद इसे दोबारा शुरू कर दिया गया। इसके बाद 2004 में (4-6 जनवरी) भी अटल सार्क सम्मेलन अटेंड करने इस्लामाबाद पहुंचे थे। 

पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत बेनजीर भुट्टो के साथ भी अटल बिहारी वाजपेयी ने मुलाकात की। 15 और 16 जुलाई 2001 को पाक राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ और तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बीच आगरा में बैठक हुई। लेकिन यह बैठक बेनतीजा निकली और दोनों देशों के रिश्तों में और भी तल्खी आ गई।


अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री के रूप में तीन बार देश का नेतृत्व किया है। इस दौरान उन्होंने अपने भाषणों से पाकिस्तान को हिलाकर रख दिया। वे पहली बार साल 1996 में 16 मई से 1 जून तक, 19 मार्च 1998 से 26 अप्रैल 1999 तक और फिर 13 अक्टूबर 1999 से 22 मई 2004 तक देश के प्रधानमंत्री रहे हैं।
 
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