{"_id":"8ba8c87535ec4be15062137d717784c3","slug":"what-jammu-kashmir-expects-from-general-budget-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जानिए, आम बजट से क्या चाहता है कश्मीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जानिए, आम बजट से क्या चाहता है कश्मीर
ब्यूरो/अमर उजाला, श्रीनगर
Updated Sat, 14 Feb 2015 11:10 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सैलाब में सब कुछ लुटाने के बाद अब कश्मीर घाटी के उद्योग और व्यापार जगत के लोग अब केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के पिटारे पर नजर गड़ाए बैठे हैं कि 28 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय आम बजट में उन्हें पटरी पर लाने के लिए क्या किया जाएगा। सितंबर माह में आई बाढ़ में बुरी तरह ध्वस्त हुए औद्योगिक, व्यापारिक व पर्यटन ढांचे को बिना सरकारी मदद के पटरी में लाने में कम से कम 25 साल लग जाएंगे।
विज्ञापन
ऐसे में केंद्र सरकार की मदद से ही उसे कुछ सालों में पटरी पर लाया जा सकता है। कश्मीर चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के पूर्व प्रेसीडेंट व विशेषज्ञ शकील कलंदर कहते हैं कि बाढ़ में एक लाख लोगों के उद्योग, व्यापार और अन्य कारोबार प्रभावित हुए हैं। छह लाख से ज्यादा लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। सैलाब में 25 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
विज्ञापन
इनमें से 1500 करोड़ का इंश्योरेंस होगा, लेकिन बाकी नुकसान कैसे पूरा होगा। प्रधानमंत्री राहत कोष और एनडीआरएफ से अभी तक लोगों के आवास को पहुंचे नुकसान में मदद मिली है। लेकिन आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाने के लिए अभी तक कुछ नहीं हुआ है। अब सभी की नजरें वित्त मंत्री पर टिकी हैं। शायद वे कश्मीर को राहत दे सकें। कलंदर कहते हैं कि केंद्र सरकार को नई पालिसी बनानी होगी।
विज्ञापन
उद्योग और कारोबार को वापस पटरी में लाने के लिए लोन उपलब्ध करवाया जाए। चूंकि उन पर पहले से लोन का भार है। ऐसे में फिर लोन लेकर उसका भी ब्याज अदा करना उनके लिए आसान नहीं होगा। ऐसे में सरकार को न सिर्फ ब्याज में छूट दिलवानी होगी, बल्कि अगले दस साल तक उद्योग और व्यापार जगत को आयकर से भी छूट देनी चाहिए।