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जानिए, आम बजट से क्या चाहता है कश्मीर

Sat, 14 Feb 2015 11:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, श्रीनगर
ब्यूरो/अमर उजाला, श्रीनगर Updated Sat, 14 Feb 2015 11:10 AM IST
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what jammu kashmir expects from general budget

सैलाब में सब कुछ लुटाने के बाद अब कश्मीर घाटी के उद्योग और व्यापार जगत के लोग अब केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के पिटारे पर नजर गड़ाए बैठे हैं कि 28 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय आम बजट में उन्हें पटरी पर लाने के लिए क्या किया जाएगा। सितंबर माह में आई बाढ़ में बुरी तरह ध्वस्त हुए औद्योगिक, व्यापारिक व पर्यटन ढांचे को बिना सरकारी मदद के पटरी में लाने में कम से कम 25 साल लग जाएंगे।

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ऐसे में केंद्र सरकार की मदद से ही उसे कुछ सालों में पटरी पर लाया जा सकता है। कश्मीर चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के पूर्व प्रेसीडेंट व विशेषज्ञ शकील कलंदर कहते हैं कि बाढ़ में एक लाख लोगों के उद्योग, व्यापार और अन्य कारोबार प्रभावित हुए हैं। छह लाख से ज्यादा लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। सैलाब में 25 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
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इनमें से 1500 करोड़ का इंश्योरेंस होगा, लेकिन बाकी नुकसान कैसे पूरा होगा। प्रधानमंत्री राहत कोष और एनडीआरएफ से अभी तक लोगों के आवास को पहुंचे नुकसान में मदद मिली है। लेकिन आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाने के लिए अभी तक कुछ नहीं हुआ है। अब सभी की नजरें वित्त मंत्री पर टिकी हैं। शायद वे कश्मीर को राहत दे सकें। कलंदर कहते हैं कि केंद्र सरकार को नई पालिसी बनानी होगी।
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उद्योग और कारोबार को वापस पटरी में लाने के लिए लोन उपलब्ध करवाया जाए। चूंकि उन पर पहले से लोन का भार है। ऐसे में फिर लोन लेकर उसका भी ब्याज अदा करना उनके लिए आसान नहीं होगा। ऐसे में सरकार को न सिर्फ ब्याज में छूट दिलवानी होगी, बल्कि अगले दस साल तक उद्योग और व्यापार जगत को आयकर से भी छूट देनी चाहिए।

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