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Jammu News: जल जीवन मिशन पर करोड़ों खर्च, सांबा में अब भी पेयजल संकट
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शुरुआत होने की राह ताकता जल जीवन के तहत बनाया गया ओवरहेड टैंक
- जिले में 130 में से 86 जलापूर्ति योजनाएं पूरीं, पानी की समस्या जस की तस
- दशकों पुरानी वितरण प्रणाली, तीसरे दिन महज 45 मिनट तक आ रहा पानी
विशाल जसरोटिया
सांबा। जीवन की सबसे बुनियादी जरूरत पानी है। लोगों को रोज पीने के लिए शुद्ध पानी की जरूरत होती है। अगर पानी न मिले तो परेशानी होना लाजमी है। जल जीवन मिशन के तहत सांबा में करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। बावजूद इसके लोगों को पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है। लोगों को तीसरे दिन महज 45 मिनट के लिए पीने के पानी की आपूर्ति की जा रही है। कई ग्रामीण इलाके तो ऐसे हैं जहां सप्ताह में एक बार ही नलाें में पानी आ रहा है। लोगों का कहना है कि यह मिशन सिर्फ कागजों में ही स्वच्छ जल पहुंचा रहा है हकीकत में लोग अभी भी किल्लत झेलने को मजबूर हैं।
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जेजेएम से ग्रामीण इलाकों तक पेयजल आपूर्ति करना था लक्ष्य
जल जीवन मिशन (जेजेएम) केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना है। योजना का आधार 2019 में रखा गया था। 2022-23 के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री ने 60,000 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। मार्च 2023 में काम शुरू हुआ और दिसंबर 2024 तक इसे पूरा किया जाना था। सांबा जिले में जल जीवन मिशन योजना सिर्फ कागजों में ही सफलता की कहानी गढ़ रही है। हकीकत विपरीत है। जिले के दूरस्थ नड्ड, पुरमंडल और सुंब को छोड़ दिया जाए तो जिला मुख्यालय सांबा के साथ लगती पड़ेल, बढेरी, चक मंगा और मंधेरा बस्ती ग्राम पंचायतों में योजना का हाल बेहाल है।
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लोगों का आरोप, समस्या जस की तस
सांबा के पडेल निवासी अजय कुमार, चक मंगा के नीटू कुमार, नानक चक के मुकेश कुमार, बढेरी के मदन लाल ने बताया कि सांबा में करोड़ों रुपये जल जीवन मिशन के तहत ट्यूबवेल, ओवरहेड टैंक बनाकर पाइप तो बिछा दिए गए लेकिन कहीं काम अधूरे छोड़ दिए गए तो कहीं ट्यूबवेल और ओवरहेड टैंक चालू नहीं हो पाए। मंधेरा बस्ती के नेक मोहम्मद और शेर अली ने बताया कि उनके इलाके में ट्यूबवेल बनाकर पाइप भी बिछा दिए गए। बाद में पता चला कि पानी दूषित है और पीने के लायक नहीं है। लोगों को आज भी टैंकर के माध्यम से पीने का पानी हासिल करना पड़ रहा है।
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जीवन मिशन योजना के तहत घोटालों के आरोप
युवा समाजसेवी और पूर्व सरपंच रविंदर सिंह लवलू व युवा नेता संदीप शर्मा ने बताया कि जल शक्ति विभाग और ठेकेदार मिलीभगत से भ्रष्टाचार किया जा रहा है। कहीं गुणवत्ता सही नहीं तो कहीं खामियों के कारण लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा। जल आपूर्ति के ढांचे खड़े करने के दावे तो किए जा रहे हैं लेकिन किन इलाकों में निर्बाध जलापूर्ति की जा रही है इसकी कोई जानकारी नहीं है। केंद्र और प्रदेश प्रशासन को बरती जा रही लापरवाही की जांच करनी चाहिए।
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एक डग वेल का काम पूरा हो चुका है। 80 में से 74 ट्यूबवेल, 21 बोरवेल, 11 में से 10 रैपिड सैंड फिल्ट्रेशन प्लांट और 55 में से 50 ओएचटी का निर्माण कार्य भी पूरा हो चुका है। जल्द शेष कार्यों को पूरा किया जाएगा ताकि लोगों को योजनाओं का लाभ मिल सके।
सुरिंद्र मोहन, कार्यकारी अभियंता, जलशक्ति विभाग, सांबा
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डीसी ने दिए हैं परियोजनाओं का आकलन करने के निर्देश
डीसी आयूषी सूदन ने 10 अगस्त को बैठक कर जल जीवन मिशन के अंतर्गत परियोजनाओं की स्थिति और प्रगति का आकलन करने के लिए अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए थे। डीसी के अनुसार कार्यकारी अभियंता, सहायक अभियंताओं और कनिष्ठ अभियंताओं को संबंधित उपमंडल मजिस्ट्रेटों के साथ निकट समन्वय में सभी स्थल-विशिष्ट मुद्दों को हल करने के निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने उप-मंडल मजिस्ट्रेटों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में जल जीवन मिशन कार्यों की गति, गुणवत्ता और तकनीकी मानकों के पालन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने का भी निर्देश दिया है।
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- दशकों पुरानी वितरण प्रणाली, तीसरे दिन महज 45 मिनट तक आ रहा पानी
विशाल जसरोटिया
सांबा। जीवन की सबसे बुनियादी जरूरत पानी है। लोगों को रोज पीने के लिए शुद्ध पानी की जरूरत होती है। अगर पानी न मिले तो परेशानी होना लाजमी है। जल जीवन मिशन के तहत सांबा में करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। बावजूद इसके लोगों को पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है। लोगों को तीसरे दिन महज 45 मिनट के लिए पीने के पानी की आपूर्ति की जा रही है। कई ग्रामीण इलाके तो ऐसे हैं जहां सप्ताह में एक बार ही नलाें में पानी आ रहा है। लोगों का कहना है कि यह मिशन सिर्फ कागजों में ही स्वच्छ जल पहुंचा रहा है हकीकत में लोग अभी भी किल्लत झेलने को मजबूर हैं।
जेजेएम से ग्रामीण इलाकों तक पेयजल आपूर्ति करना था लक्ष्य
जल जीवन मिशन (जेजेएम) केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना है। योजना का आधार 2019 में रखा गया था। 2022-23 के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री ने 60,000 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। मार्च 2023 में काम शुरू हुआ और दिसंबर 2024 तक इसे पूरा किया जाना था। सांबा जिले में जल जीवन मिशन योजना सिर्फ कागजों में ही सफलता की कहानी गढ़ रही है। हकीकत विपरीत है। जिले के दूरस्थ नड्ड, पुरमंडल और सुंब को छोड़ दिया जाए तो जिला मुख्यालय सांबा के साथ लगती पड़ेल, बढेरी, चक मंगा और मंधेरा बस्ती ग्राम पंचायतों में योजना का हाल बेहाल है।
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लोगों का आरोप, समस्या जस की तस
सांबा के पडेल निवासी अजय कुमार, चक मंगा के नीटू कुमार, नानक चक के मुकेश कुमार, बढेरी के मदन लाल ने बताया कि सांबा में करोड़ों रुपये जल जीवन मिशन के तहत ट्यूबवेल, ओवरहेड टैंक बनाकर पाइप तो बिछा दिए गए लेकिन कहीं काम अधूरे छोड़ दिए गए तो कहीं ट्यूबवेल और ओवरहेड टैंक चालू नहीं हो पाए। मंधेरा बस्ती के नेक मोहम्मद और शेर अली ने बताया कि उनके इलाके में ट्यूबवेल बनाकर पाइप भी बिछा दिए गए। बाद में पता चला कि पानी दूषित है और पीने के लायक नहीं है। लोगों को आज भी टैंकर के माध्यम से पीने का पानी हासिल करना पड़ रहा है।
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जीवन मिशन योजना के तहत घोटालों के आरोप
युवा समाजसेवी और पूर्व सरपंच रविंदर सिंह लवलू व युवा नेता संदीप शर्मा ने बताया कि जल शक्ति विभाग और ठेकेदार मिलीभगत से भ्रष्टाचार किया जा रहा है। कहीं गुणवत्ता सही नहीं तो कहीं खामियों के कारण लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा। जल आपूर्ति के ढांचे खड़े करने के दावे तो किए जा रहे हैं लेकिन किन इलाकों में निर्बाध जलापूर्ति की जा रही है इसकी कोई जानकारी नहीं है। केंद्र और प्रदेश प्रशासन को बरती जा रही लापरवाही की जांच करनी चाहिए।
एक डग वेल का काम पूरा हो चुका है। 80 में से 74 ट्यूबवेल, 21 बोरवेल, 11 में से 10 रैपिड सैंड फिल्ट्रेशन प्लांट और 55 में से 50 ओएचटी का निर्माण कार्य भी पूरा हो चुका है। जल्द शेष कार्यों को पूरा किया जाएगा ताकि लोगों को योजनाओं का लाभ मिल सके।
सुरिंद्र मोहन, कार्यकारी अभियंता, जलशक्ति विभाग, सांबा
डीसी ने दिए हैं परियोजनाओं का आकलन करने के निर्देश
डीसी आयूषी सूदन ने 10 अगस्त को बैठक कर जल जीवन मिशन के अंतर्गत परियोजनाओं की स्थिति और प्रगति का आकलन करने के लिए अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए थे। डीसी के अनुसार कार्यकारी अभियंता, सहायक अभियंताओं और कनिष्ठ अभियंताओं को संबंधित उपमंडल मजिस्ट्रेटों के साथ निकट समन्वय में सभी स्थल-विशिष्ट मुद्दों को हल करने के निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने उप-मंडल मजिस्ट्रेटों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में जल जीवन मिशन कार्यों की गति, गुणवत्ता और तकनीकी मानकों के पालन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने का भी निर्देश दिया है।