कैदी की रिहाई पर शोर मचाना गलत: मुफ्ती
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मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने कैदी की रिहाई पर शोर मचाने को गलत बताते हुए कहा कि जेल में रखने से विचार और सख्त होते हैं। उनकी सरकार ने कोशिश की कि शांति लायक माहौल तैयार हो, पर एक कैदी की रिहाई से ही इतना शोर हो गया। विधान परिषद में राज्यपाल अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने ये बात कहीं।
सईद ने कहा कि रियासत की जेलों में पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत 37 कैदी जेलों में बंद हैं। इनमें बीस विदेशी और छह लकड़ी तस्कर हैं। पीएसए के तहत अन्य 11 कैदी हैं। मुफ्ती ने कहा कि रियासत में लोकतंत्र की मजबूत जड़ें हैं, जो कि एक दो कैदी को छोड़ने से नहीं हिल सकती।
उन्होंने कहा कि साल 2002 में उन्होंने कांग्रेस के साथ मिलकर रियासत में गठबंधन सरकार बनाई और बातचीत और शांति लायक माहौल बनाया। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी दूरदर्शिता का परिचय देते हुए राज्य सरकार की कोशिशों में पूरा सहयोग किया।
इसी का नतीजा रहा कि पाक से बेहतर रिश्ते हुए। 2002 से लेकर 2010 तक सीमा पर शांति बनी रही। वाजपेयी और मुशर्रफ के मध्य बातचीत का दौर चला। हालात सामान्य होने लगे।
ग्रेनेड से न गोली से बात बनेगी बोली से
अब क्या हो गया। न ग्रेनेड से न गोली से बात बनेगी बोली से। सीमा पर शांति लाने और रियासत में शांति और विकास के लिए पाकिस्तान समेत रियासत में हुर्रियत समेतआंतरिक हितधारकों से भी वार्ता जरूरी है और इसके लिए माहौल बनाना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकास, पारदर्शी और बेहतर शासन का भरोसा दिलाया है। शांति के लिए यह जरूरी है। मुफ्ती ने कहा कि बडगाम में सेना की ज्यादती हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने जांच करवाई और पाया कि निर्दोष युवकों के साथ बेइंसाफी हुई। फर्जी मुठभेड़ में पाए गए सैन्य कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई। इससे माहौल बनता है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और नेकां ने खंडित जनादेश के बाद पीडीपी से संपर्क कर समर्थन की बात कही, लेकिन उनका मानना था कि देश में भाजपा को जनादेश मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जनादेश मिला है। जम्मू-कश्मीर में कश्मीर में पीडीपी और जम्मू में भाजपा को जनादेश मिला है।
ऐसे में जनादेश का सम्मान होना चाहिए और रियासत में हालात को बेहतर बनाने की दिशा में नई पहल होनी चाहिए। भाजपा-पीडीपी की सरकार न्यूनतम साझा कार्यक्रम के आधार पर बनी है। इसमें रियासत के विशेष दर्जे को बहाल रखने और सेना के अधीन अनाधिकृत तौर पर जमीन को वापस लेकर उसके मालिकों को देना भी शामिल है।