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विधानसभा और विधान परिषद में नेकां-कांग्रेस का हंगामा

Fri, 27 May 2016 11:24 PM IST
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर Updated Fri, 27 May 2016 11:24 PM IST
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Uproar in J&K assembly
व‌िधानसभा में हंगामा - फोटो : Amar Ujala
विधानसभा सत्र के तीसरे दिन भी नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के विधायकों द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन, हंदवाड़ा फायरिंग में नागरिकों की मौत और नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट को लेकर सदन में हंगामा किया गया।
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शुक्रवार को जैसे ही स्पीकर सदन में आए और कार्रवाई शुरू करने लगे, तो नेकां और कांग्रेस विधायकों ने इन मुद्दों पर अपनी जगह खड़े होकर विरोध करना शुरू कर दिया। इतने में सीपीएम के मोहम्मद यूसुफ तारिगामी द्वारा भी स्थगन प्रस्ताव पेश किया गया, लेकिन, उसे स्पीकर ने नामंजूर कर दिया।
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विपक्ष इन मुद्दों पर बहस करने की मांग कर रहा था। लेकिन, स्पीकर ने उन्हें कहा कि पहले राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस होगी, उसके बाद देखेंगे। इस पर नेकां और कांग्रेस के सभी विधायक वेल में उतर आए और जमकर हंगामा करने लगे।
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विधायकों और मार्शलों के बीच धक्का मुक्की भी हुई। इस बीच, इंजीनियर रशीद भी वेल में हंदवाड़ा हत्याकांड की जांच को लेकर हंगामा करने लगे। रशीद रायशुमारी कराने की भी मांग कर रहे थे।

सदन में हंगामे के दौरान सीएपीडी मंत्री चौधरी जुल्फिकार अली ने कहा कि नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट यूपीए-2 के शासनकाल के दौरान मंजूर हुआ है। हम इस पर बहस करने के लिए तैयार हैं। हंगामे के दौरान वन मंत्री चौधरी लाल सिंह किसी सवाल का जवाब देने खड़े हुए तो विपक्ष के विधायकों द्वारा शेम-शेम के नारे लगाए गए।

विधान परिषद में भी विपक्ष ने किया हंगामा...

Uproar in J&K assembly
जम्मू-कश्मीर व‌िधानसभा - फोटो : Amar Ujala
काफी देर तक सदन में लाल सिंह हाय-हाय के नारे गूंजे। नेकां के अब्दुल मजीद लारमी और अब्दुल जब्बार द्वारा स्पीकर की कुर्सी तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन, उन्हें मार्शलों द्वारा जबरदस्ती वापस लाया गया।

हंगामे के बावजूद क्वेश्चन ऑवर जारी रहे। जैसे ही शिक्षा मंत्री नईम अख्तर प्रश्न का जवाब देने उठे तो नेकां के देवेंद्र राणा सहित कई अन्य विधायक उनके सामने खड़े हो गए और उन्हें जवाब नहीं देने दिया। इस पर स्पीकर द्वारा हस्तक्षेप करते हुए कहा गया कि राणा साहब आप ऐसा नहीं कर सकते। यह असंसदीय तरीका है।

यह सब देख पीडीपी के विधायक जावेद मुस्तफा मीर आग बबूला होकर उठे और कहने लगे कि यह कौन सा तरीका है मंत्री को घेरने का? अगर दम है, तो मेरे सामने आकर करो। वहीं पीडीपी के अब्दुल रहमान वीरी भी गुस्सा हुए। उन्होंने खड़े होकर कहा कि शर्म आनी चाहिए इन सीनियर विधायकों को।

​ऐसा लगता है इन्हें लोगों की समस्याओं की कोई चिंता नहीं। यह ऐसा कर उनकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इस बीच, करीब डेढ़ घंटे तक सदन में हंगामा करने के बाद विपक्ष के विधायक आरएसएस की सरकार को एक धक्का और दो के नारे लगाते हुए सदन से वॉक आउट कर गए।

विधान परिषद में भी यही सब मुद्दे छाए रहे और नेशनल कांफ्रेंस-कांग्रेस विधायकों के भी वहां एक से सुर दिखे। वह इन सब मुद्दों पर बहस चाहते थे, लेकिन, ऐसा करने की अनुमति नहीं मिली। इससे नाराज होकर विपक्षी सदस्य वेल में उतर आए।

हंगामा कर रहे सदस्यों को यहां पर भी सीएपीडी मंत्री चौधरी जुल्फिकार अली ने जवाब दिया कि उन्हीं की सरकार ने केंद्र में यूपीए-2 से इस बिल को पास करने की सिफारिश की थी और अब आज यह लोग हंगामा कर रहे हैं। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा चोर मचाए शोर। जुल्फिकार ने कहा कि उनके पास उमर अब्दुल्ला के हस्ताक्षर वाले दस्तावेज हैं।

यह अगर बहस चाहते हैं, तो की जाए, दूध का दूध और पानी का पानी होगा। इस दौरान जब विपक्ष के सदस्य हंदवाड़ा के कातिलों को पेश करो के नारे बुलंद कर रहे थे, तो भाजपा एमएलसी सोफी यूसुफ ने उन पर निशाना साधते हुए कहा वर्ष 2010 के कातिलों को पेश करो।

यहां तक कि सज्जाद गनी लोन भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने एक मृत युवक के पोस्टर विधायकों के हाथ में होने को लेकर कहा कि आप इसकी नुमाइश कर रहे हो पहले अपने हाथ देखो जो 2010 के खून से रंगे हुए हैं। काफी देर तक हंगामा जारी रहा और इसके बाद विपक्ष ने वाकआउट कर दिया।
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