अगले छह महीने रहेगा बेमौसम बरसात का असर
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बेमौसम बारिश ने किसानों की अर्थव्यवस्था को पटरी से उतार दिया है। इसका असर अगले छह महीनों तक दिखेगा। हालांकि बारिश से कंडी इलाकों को फायदा हुआ है, जो हर सीजन में सूखे की मार झेलते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बेमौसम बारिश कंडी इलाकों में रबी की फसलों के लिए फायदेमंद होगी।
बारिश से तबाह हुई रबी फसलों के लिए किसानों को तत्काल प्रभाव से कोई फायदा होने की संभावना नजर नहीं आ रही। अब तक किसानों को पाक गोलाबारी और पिछले साल सितंबर में आई बाढ़ से हुए नुकसान का मुआवजा नहीं मिल पाया है। यहां तक कि फेसिंग के अधीन आने वाली सीमांत इलाकों की जमीन का मुआवजा भी नहीं मिला।
कृषि विभाग ने राजस्व विभाग को नुकसान की रिपोर्ट तैयार करने को कहा है। इस रिपोर्ट को केंद्र के पास भेजा जाएगा। तब जाकर कुछ राहत मिलेगी। राज्य सरकार के बजट में भी कुछ खास मिलने की उम्मीद नहीं है।
इस बार महंगी होंगी सब्जियां
किसानों को नुकसान
कृषि विशेषज्ञ और कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक डा. जेपी शर्मा का कहना है कि फसलें 60 फीसदी खराब हुई हैं। एक कनाल पर गेहूं की बिजाई का खर्चा औसत 1000 रुपये है।
देर से होंगी मौसमी सब्जियां
गर्मियों में मूली, करेला, घिया, भिंडी, टींडे, बैंगन आदि सब्जियां मुख्य रूप से होती हैं। इनको किसानों ने लगाना शुरू कर दिया था, लेकिन बारिश में सब बह गया। अब किसानों को बिजाई के लिए 15 दिनों का इंतजार करना पड़ेगा। इसलिए ये सब्जियां देरी से बाजार में आएंगी।
महंगी होंगी सब्जियां
स्थानीय सब्जियां में देरी होने से सब्जियां पहले बाहरी राज्यों से आएंगी। ऐसे में सब्जियां पांच से दस रुपये प्रति किलो महंगी बिक सकती है।
बारशि के कारण बीज भी तैयार नहीं हुए
कंडी क्षेत्र को फायदा
जम्मू संभाग में कंडी इलाकों में डेढ़ लाख हेक्टेयर पर रबी फसलें होती हैं। हर वर्ष मार्च में इन क्षेत्रों में पानी की किल्लत हो जाती है और फसल को सूखे की मार लग जाती है, लेकिन इस बार मार्च में खूब बारिश हुई। इससे कंडी की फसलों को पर्याप्त मात्रा में पानी मिला है। इसलिए फसल ठीक होगी।
महंगी हो सकती है दाल-रोटी
बारिश की वजह से दलहन, तेल और गेहूं की फसलें नष्ट हुई है। गेहूं बाहरी राज्यों से ही खरीदना पड़ेगा। इससे गेहूं के दाम बढ़ सकते हैं। 20 रुपए किलो बिकने वाला आटा 25 रुपये तक पहुंच सकता है। सरसों का तेल 130 रुपये से 150 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकता है।
बीज भी तैयार नहीं हुए
सब्जियों और दलहन के बीज भी महंगे हो सकते हैं। जानकारी के अनुसार कृषि विभाग के चिन्नौर फार्म, कृषि विश्वविद्यालय के चट्ठा और आरएस पुरा के फार्म में बीज तैयार करने के लिए बिजाई की गई थी, लेकिन बारिश इतनी हुई कि बीज तैयार ही नहीं हो पाए।