आधी रात को अरनिया में घर छोड़ भागे लोग
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रविवार की आधी रात से निकोआल और फिर चिनाज पोस्ट पर की गई पाकिस्तानी गोलाबारी के बीच अरनिया कसबे में पलायन जैसी स्थिति बन गई। रात को ही कई परिवारों ने ट्रैक्टर ट्रालियों में सामान भर लिया था, लेकिन दहशतजदा ग्रामीण दहलीज से पांव बाहर रखने का साहस नहीं जुटा पाए।
तकरीबन बारह दिनों तक खामोश रहने के बाद पाकिस्तानी रेंजरों ने रविवार की रात सवा ग्यारह बजे अपनी बंदूकों का मुंह खोल दिया। सबसे पहले उन्होंने निकोआल पोस्ट और आसपास के क्षेत्र को निशाना बनाया। इसके बाद चिनाज पोस्ट पर भी भारी गोलाबारी करनी शुरू कर दी थी।
अंधाधुंध गोलाबारी और धमाकों की आवाज सुनकर जैसे ही लोगों की आंखें खुलीं तो बस एक ही ख्याल आया कि जान बचाने के लिए घर छोड़ा जाए।
धमाकों की आवाज सुनकर नींद टूट गई
अरनियां निवासी राकेश कुमार ने बताया कि परिवार के लोग चैन की नींद ले रहे थे कि धमाकों की आवाज सुनकर नींद टूट गई। भयंकर गोलाबारी होते देख रात को ही पलायन करने की सोचने लगे। सामान भी बांध लिया, लेकिन लगातार गोलाबारी होते देख घर में ही छिपे रहना उचित समझा।
नरेश सैनी, रामलाल, अतर सिंह, चमनलाल आदि ने कहा कि रात बारह बजे ही उन्होंने पलायन की पूरी तैयारी कर ली थी। बाइक और ट्रैक्टर ट्रालियों में सामान भी रख लिया था। लेकिन रात डेढ़ बजे के करीब गोलाबारी की गति धीमी पड़ने से घर पलायन रद्द कर दिया। अला और अरनिया सहित अन्य सीमावर्ती गांवों के कई परिवारों ने भी पलायन की पूरी तैयारी कर ली थी।
कदोयाल निवासी तिलक राज ने बताया कि रविवार की रात को वह बाड़ी ब्राह्मणा में थे, वहां तक धमाके सुनाई दे रहे थे। तभी घर से फोन आया कि यहां पर भयंकर गोलाबारी हो रही है। इस पर उन्होंने घरवालों को कहा कि वह किसी तरह घर में बड़ी दीवार की आड़ लेकर रात गुजार दें।