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Jammu News: निजीकरण के खिलाफ कर्मचारी यूनियन ने फूंका विरोध का बिगुल
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- जम्मू से कटड़ा के बीच 16 करोड़ के विभिन्न कार्यों का एनआरएमयू ने जताया रोष
जम्मू। जम्मू और कटड़ा सेक्शन के एसी विभाग में मेंटेनेंस एवं एस्कॉर्टिंग कार्य को अगले तीन साल के लिए निजी फर्म को सौंप दिया है। इस अवधि में संबंधित फर्म को 16.73 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जाएगा। इसकी जानकारी मिलते ही नार्दर्न रेलवे मजदूर यूनियन (एनआरएमयू) ने विरोध का बिगुल फूंक दिया है।
यूनियन का तर्क है कि जब जम्मू डिवीजन में पहले से प्रशिक्षित, अनुभवी और तकनीकी रूप से सक्षम स्थायी स्टाफ मौजूद है तो फिर निजीकरण की आवश्यकता क्यों पड़ी? क्या रेलवे अपने ही कर्मचारियों की क्षमता पर भरोसा नहीं करता या फिर जानबूझकर उन्हें हाशिए पर धकेला जा रहा है सहित कई अन्य सवालों से संबंधित ज्ञापन वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता को भेजा है। चेतावनी दी है कि अगर इसे रोेका नहीं गया तो दिल्ली तक आंदोलन होगा।
ज्ञापन में कहा है कि सबसे चौंकाने वाला पहलू टेंडर की भारी भरकम राशि है। 36 महीनों में 16.73 करोड़ खर्च करने का आधार क्या है, यह अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। क्या यही कार्य मौजूदा स्टाफ से कम लागत और बेहतर नियंत्रण में नहीं कराए जा सकते थे?।
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जम्मू मंडल के शाखा अध्यक्ष हरपाल सिंह ने कहा है कि यह टेंडर रेलवे में स्थायी रोजगार की अवधारणा पर सीधा प्रहार है। इसकी पारदर्शी समीक्षा, लागत-तुलना रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए।
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जम्मू। जम्मू और कटड़ा सेक्शन के एसी विभाग में मेंटेनेंस एवं एस्कॉर्टिंग कार्य को अगले तीन साल के लिए निजी फर्म को सौंप दिया है। इस अवधि में संबंधित फर्म को 16.73 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जाएगा। इसकी जानकारी मिलते ही नार्दर्न रेलवे मजदूर यूनियन (एनआरएमयू) ने विरोध का बिगुल फूंक दिया है।
यूनियन का तर्क है कि जब जम्मू डिवीजन में पहले से प्रशिक्षित, अनुभवी और तकनीकी रूप से सक्षम स्थायी स्टाफ मौजूद है तो फिर निजीकरण की आवश्यकता क्यों पड़ी? क्या रेलवे अपने ही कर्मचारियों की क्षमता पर भरोसा नहीं करता या फिर जानबूझकर उन्हें हाशिए पर धकेला जा रहा है सहित कई अन्य सवालों से संबंधित ज्ञापन वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता को भेजा है। चेतावनी दी है कि अगर इसे रोेका नहीं गया तो दिल्ली तक आंदोलन होगा।
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ज्ञापन में कहा है कि सबसे चौंकाने वाला पहलू टेंडर की भारी भरकम राशि है। 36 महीनों में 16.73 करोड़ खर्च करने का आधार क्या है, यह अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। क्या यही कार्य मौजूदा स्टाफ से कम लागत और बेहतर नियंत्रण में नहीं कराए जा सकते थे?।
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जम्मू मंडल के शाखा अध्यक्ष हरपाल सिंह ने कहा है कि यह टेंडर रेलवे में स्थायी रोजगार की अवधारणा पर सीधा प्रहार है। इसकी पारदर्शी समीक्षा, लागत-तुलना रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए।