उधमपुर बम धमाके के आरोपी को उम्रकैद
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प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरएस जैन ने उधमपुर के बिरमा क्षेत्र में हुए कार बम धमाके के आरोपी व लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी अब्दुल मजीद (निवासी बहरनोट, थन्ना मंडी, राजोरी) को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही जुर्माना भी लगाया है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने पाया कि दो मई 2011 को बिरमा पुल पर कार में किया गया विस्फोट सुनियोजित था। इस हमले में सेना के मेजर जनरल दीपक पठानिया की कार क्षतिग्रस्त हो गई थी और वह बाल-बाल बचे थे। जबकि एक दूधवाले कुलदीप कुमार की मौत हो गई थी। छह अन्य लोग घायल हो गए थे।
प्रधान न्यायाधीश आर एस जैन ने पाया कि अब्दुल मजीद के खिलाफ अन्य कोई आपराधिक मामला नहीं है और उसकी उम्र भी 63 साल के करीब है। अदालत के समक्ष पेश किए गए सबूतों को देखने के बाद पाया गया कि यह दुर्लभ केसों के श्रेणी में नहीं आता है।
ऐसे बनाई थी हमले की योजना
न्यायालय ने आरपीसी की धारा 302 में उम्र कैद और 25 हजार रुपये जुर्माना, गैर कानूनी गतिविधियों (प्रतिबंधित एक्ट) की धारा 165 में उम्रकैद और पचास हजार रुपये जुर्माना, गैर कानूनी गतिविधियों की धारा 18 में दस साल कैद और पांच हजार जुर्माना, आरपीसी की धारा 307 में दस साल कैद और 25 हजार जुर्माना, आरपीसी की धारा 326 में पांच साल कैद, धारा 324 में तीन साल कैद और एक्सप्लोसिव सब्सटांस एक्ट की धारा 3 में दस साल कैद और 25 हजार जुर्माना की सजा सुनाई। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
पुलिस केस के अनुसार अब्दुल मजीद ने लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी गुलाम सरवर के साथ मिलकर आतंकी घटना को अंजाम दिया है। विस्फोट में उपयोग की गई मारुति कार (डीएल 3 सीएफ-8035) अब्दुल मजीद ने खरीदी थी।
गुलाम सरवर ने उस कार में आरडीएक्स रखा। सुबह साढ़े आठ बजे सेना के उत्तरी कमान हेडक्वार्टर के नजदीक बिरमा पुल पर कार खड़ी कर रिमोट कंट्रोल से उसे उड़ा दिया गया। केस की जांच करने के बाद पुलिस ने गुलाम सरवर और अब्दुल मजीद के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया। गुलाम सरवर अभी तक पकड़ा नहीं गया है। उसे भगोड़ा घोषित कर 512 सीआरपीसी के तहत वारंट जारी किए गए हैं।