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दो कश्मीरी नेताओं की नजरबंदी हटी, दो को भेजा घर
Tue, 26 Nov 2019 05:33 AM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
Published by: Pranjal Dixit
Updated Tue, 26 Nov 2019 05:33 AM IST
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एलएलए हॉस्टल, श्रीनगर
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
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अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद नजरबंद तथा हिरासत में लिए गए नेता अब छोड़े जाने लगे हैं। सोमवार को मुर्मू प्रशासन ने स्थितियों का आकलन करने के बाद उत्तरी कश्मीर के दो नेताओं की नजरबंदी समाप्त की जबकि दो नेताओं को एमएलए हॉस्टल में बने अस्थायी जेल से घर पर शिफ्ट कर दिया। यह कार्रवाई 110 दिन बाद की गई है। इससे पहले शनिवार को अलग-अलग पार्टियों के चार नेताओं को उनके आग्रह पर शनिवार को कुछ घंटे परिवार वालों के साथ बिताने की अनुमति दी गई थी।
प्रशासन ने बारामुला के दो पूर्व मंत्रियों दिलावर मीर तथा गुलाम हसन मीर की नजरबंदी सोमवार को हटा दी। 2002 में पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की कैबिनेट में गुलाम हसन मंत्री थे।
बाद में उन्होंने मुफ्ती से अलग होकर डेमोक्रेटिक पार्टी नेशनलिस्ट (डीपीएन) का गठन कर लिया। इसके साथ ही पूर्व विधायक अशरफ मीर तथा हाकिम यासीन को एमएलए हास्टल से घर पर शिफ्ट कर दिया गया, लेकिन उनकी हिरासत जारी रहेगी।
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अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला व महबूबा मुफ्ती समेत नेकां, पीडीपी, पीपुल्स कांफ्रेंस के कई नेताओं को हिरासत में लिया गया है। बाद में 17 सितंबर को फारूक को पीएसए में निरुद्ध कर दिया गया।
इससे पहले 17 नवंबर को डल झील किनारे बने सेंटूर होटल में बंद 34 नेताओं को कड़ी सुरक्षा के बीच एमएलए हॉस्टल में शिफ्ट किया गया। यहां मोबाइल फोन इस्तेमाल किए जाने की सूचना पर 23 नवंबर को प्रशासन ने तलाशी ली तो 12 मोबाइल बरामद किए गए। एमएलए हॉस्टल को अस्थायी जेल बनाया गया है। जेल मैन्युअल के अनुसार यहां मोबाइल का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
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प्रशासन ने बारामुला के दो पूर्व मंत्रियों दिलावर मीर तथा गुलाम हसन मीर की नजरबंदी सोमवार को हटा दी। 2002 में पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की कैबिनेट में गुलाम हसन मंत्री थे।
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बाद में उन्होंने मुफ्ती से अलग होकर डेमोक्रेटिक पार्टी नेशनलिस्ट (डीपीएन) का गठन कर लिया। इसके साथ ही पूर्व विधायक अशरफ मीर तथा हाकिम यासीन को एमएलए हास्टल से घर पर शिफ्ट कर दिया गया, लेकिन उनकी हिरासत जारी रहेगी।
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अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला व महबूबा मुफ्ती समेत नेकां, पीडीपी, पीपुल्स कांफ्रेंस के कई नेताओं को हिरासत में लिया गया है। बाद में 17 सितंबर को फारूक को पीएसए में निरुद्ध कर दिया गया।
इससे पहले 17 नवंबर को डल झील किनारे बने सेंटूर होटल में बंद 34 नेताओं को कड़ी सुरक्षा के बीच एमएलए हॉस्टल में शिफ्ट किया गया। यहां मोबाइल फोन इस्तेमाल किए जाने की सूचना पर 23 नवंबर को प्रशासन ने तलाशी ली तो 12 मोबाइल बरामद किए गए। एमएलए हॉस्टल को अस्थायी जेल बनाया गया है। जेल मैन्युअल के अनुसार यहां मोबाइल का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।