J&K: कैबिनेट मीटिंग में उठीं तल्खियां दूर करने की कवायद शुरू
9 दिसंबर को हुई कैबिनेट मीटिंग को मुख्यमंत्री ने बीच में छोड़ दिया था और अपने कैबिनेट के साथियों से नाराज होकर अपने सरकारी निवास चली गई थीं। इस नाराजगी की वजह को लेकर उपमुख्यमंत्री और कुछ मंत्री मुख्यमंत्री से मिले भी थे।
इससे भाजपा और पीडीपी में दूरियां बढ़ने का अंदेशा भी लगाया जा रहा था। इस नाराजगी को दूर करने के लिए सरकार ने मंत्रियों के एक समूह का गठन किया है, जो कैबिनेट मीटिंग में उठे मुद्दों पर अपनी राय देगा। इस समूह में भाजपा और पीडीपी के तीन-तीन मंत्रियों को शामिल किया गया है, जो कश्मीर पुलिस सर्विस (केपीएस) कैडर के पुनर्गठन को देखेंगी।
उपमुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह ने सोमवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री की ओर से मंत्रियों के समूह से अगली कैबिनेट से पहले अपनी रिपोर्ट देने को कहा है।
अगली कैबिनेट मीटिंग में सुलझा लिया जाएगा मामला
शनिवार को उपमुख्यमंत्री ने पुलिस सर्विस में पुनर्गठन का विरोध करने को जायज ठहराया था। उन्होंने कैबिनेट में उठे विवाद पर कहा कि यह मामला केपीएस अफसरों के पुनर्गठन का है। कैबिनेट में 30 से 40 पन्नों का नोट दिया गया था, जिसे पढ़ने और समझने में समय लगता है।
उन्होंने कहा कि भाजपा केपीएस अधिकारियों को दिए जाने वाले फाइनेंशियल मदद और प्रमोशन के खिलाफ नहीं है। उनका विरोध रैंक दिए जाने को था। उन्होंने कहा कि बिना आईपीएस में शामिल हुए आप किसी को हायर रैंक कैसे दे सकते हैं।
यह मामला डिपार्टमेंट आफ पसर्नल और ट्रेनिंग को देखना होता है। उन्होंने कहा कि यह मामला बहुत छोटा है। भाजपा मंत्री चाहते हैं कि आईजी और डीआईजी रैंक केपीएस अधिकारी को तभी मिले, जब उसको आईपीएस कैडर में शामिल किया जाए। अगली कैबिनेट मीटिंग में इस मामले को सुलझा लिया जाएगा।