जम्मू-कश्मीर: जालंधर से जम्मू के बीच डबल ट्रैक पर दौड़ेंगी ट्रेनें, मार्च से पहले पूरा होगा कठुआ-माधोपुर के बीच डबल ट्रैक का काम
पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सरहद पर रावी दरिया के महत्वपूर्ण पुल पर ट्रैक बिछाने का काम अंतिम चरण में है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार इसी महीने यह काम पूरा करने व निरीक्षण कार्य की भी तैयारी है।
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वर्ष 1972 में पठानकोट से जम्मू तक रेल ट्रैक बिछने के 50 साल बाद जालंधर से जम्मू के बीच अब डबल ट्रैक सक्रिय होने जा रहा है। पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सरहद पर रावी दरिया के महत्वपूर्ण पुल पर ट्रैक बिछाने का काम अंतिम चरण में है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार इसी महीने यह काम पूरा करने व निरीक्षण कार्य की भी तैयारी है। प्रदेश को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण रेल मार्ग पर कठुआ से माधोपुर के बीच का काम ही शेष बचा था। दस साल पहले यह काम शुरू किया गया था।
इसके लिए पहले वर्ष 2018 जिसके बाद 2020 और 2021 की समयावधि को भी यह परियोजना लांघ गई है। रेलवे की इंजीनियरिंग टीम की देखरेख में ट्रैक बिछाने व अन्य काम सात किलोमीटर के दायरे में जारी हैं। परियोजना के पूरा होने के साथ ही उत्तर भारत का जालंधर से जम्मू तक रेलवे ट्रैक डबल हो जाएगा। लगभग तीन साल पहले ही दरिया उज्ज, तरनाह नाला, बेई नाला, बसंतर, सरोर, तरोर, बलोल सहित दो दर्जन से अधिक पुलों का निर्माण पूरा कर लिया गया था।
कॉशन स्पीड से मिलेगी निजात, ग्रेडिएंट पर नहीं हांफेगा इंजन
रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कठुआ और माधोपुर के बीच रेलवे ट्रैक के दोहरीकरण का काम पूरा होने से कॉशन स्पीड नहीं रहेगी। कॉशन स्पीड में सिंगल ट्रैक से डबल ट्रैक पर जाते समय ट्रेन की गति को नियंत्रित करने के निर्देश रहते हैं। एक ट्रेन जब दूसरी ट्रेन को पास देती है तो एक ट्रेन को कुछ समय के लिए रोका जाता है।
वहीं, मालगाड़ियों को कठुआ सेक्शन के बीच ग्रेडिएंट की समस्या से नहीं जूझना पड़ेगा। जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करते ही चढ़ाई आती है, जिसमें मालगाड़ी का इंजन कई बार हांफ जाता था। ऐसे में कई बार मालगाड़ी को दूसरे इंजन की जरूरत पड़ती थी। इंजन हॉलिंग होने की स्थिति में सहायक इंजन को भेजना पड़ता था। डबल ट्रैक से यह समस्या भी खत्म हो जाएगी।
825 मीटर लंबा है रावी दरिया का रेल पुल
825 मीटर लंबे रावी पुल में 45.7 मीटर के 17 स्पैन और 18.3 मीटर स्टील गार्डर हैं। वास्तव में ये दो पुल हैं, जो एक दूसरे से सटे हुए हैं। जालंधर और जम्मू तवी के बीच 211 किलोमीटर लंबी सिंगल रेलवे लाइन के दोहरीकरण को 1997-98 में 408 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत किया गया था और काम 2002 में शुरू किया गया। 211 किमी लंबे इस ब्लॉक में, 26 स्टेशन हैं, 406 छोटे पुल और 88 प्रमुख पुल हैं, जिनमें ब्यास, चक्की, रावी, उज्ज और बसंतर नदी के पुल शामिल हैं।