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डोडा में सेना ने ग्रामीणों को दिया मशरूम की खेती का प्रशिक्षण
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भारतीय सेना ने व्यावसायिक रूप से मशरूम की खेती का आयोजन किया।
- फोटो : UDHAMPUR
डोडा। स्थानीय लोगों के जीवन को बेहतर बनाने और दूरदराज इलाकों में आबादी तक पहुंचने के लिए सेना ने हंच में वाणिज्यिक मशरूम खेती कार्यशाला आयोजित की। इस परियोजना का उद्देश्य स्थानीय लोगों के बीच आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक समावेश प्रदान करना है।
डोडा के ग्रामीण अभी भी आत्मनिर्भरता के लिए कृषि के पारंपरिक मॉडल का पालन करते हैं और जानकारी की कमी के कारण अपनी मेहनत का मुद्रीकरण नहीं कर पाते। इसके अलावा दूरस्थ प्रकृति और कुशल मार्गदर्शन की अनुपलब्धता के कारण उनकी कृषि उपज भी ठीक नहीं है। इस समस्या को कम करने और लोगों को उनकी बीमारियों से तत्काल राहत प्रदान करने के लिए सेना ने हंच गांव में वाणिज्यिक मशरूम खेती कार्यशाला आयोजित की। इस आयोजन में कुल 30 छोटे किसानों ने भाग लिया।
डोडा के दूरदराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में ग्रामीणों का चयन किया गया, और उन्हें आवश्यक बुनियादी ढांचे, मशरूम स्पॉन और कृषि के कच्चे माल के प्रावधान के साथ वैज्ञानिक मशरूम खेती तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया। लाभार्थियों में विशेष रूप से आतंकवादी हमलों के शिकार, स्थायी रूप से अक्षम या मारे गए आतंकवादियों के परिवार, दिव्यांग और गरीबी रेखा से नीचे के लोग शामिल हैं। यह पहल स्थानीय लोगों को आर्थिक स्थिति में सुधार करने का अवसर देती है।
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डोडा के ग्रामीण अभी भी आत्मनिर्भरता के लिए कृषि के पारंपरिक मॉडल का पालन करते हैं और जानकारी की कमी के कारण अपनी मेहनत का मुद्रीकरण नहीं कर पाते। इसके अलावा दूरस्थ प्रकृति और कुशल मार्गदर्शन की अनुपलब्धता के कारण उनकी कृषि उपज भी ठीक नहीं है। इस समस्या को कम करने और लोगों को उनकी बीमारियों से तत्काल राहत प्रदान करने के लिए सेना ने हंच गांव में वाणिज्यिक मशरूम खेती कार्यशाला आयोजित की। इस आयोजन में कुल 30 छोटे किसानों ने भाग लिया।
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डोडा के दूरदराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में ग्रामीणों का चयन किया गया, और उन्हें आवश्यक बुनियादी ढांचे, मशरूम स्पॉन और कृषि के कच्चे माल के प्रावधान के साथ वैज्ञानिक मशरूम खेती तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया। लाभार्थियों में विशेष रूप से आतंकवादी हमलों के शिकार, स्थायी रूप से अक्षम या मारे गए आतंकवादियों के परिवार, दिव्यांग और गरीबी रेखा से नीचे के लोग शामिल हैं। यह पहल स्थानीय लोगों को आर्थिक स्थिति में सुधार करने का अवसर देती है।
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