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तीन साल में ही फेल हो गए ट्रैफिक सिगनल

Tue, 29 Sep 2015 11:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू Updated Tue, 29 Sep 2015 11:31 PM IST
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traffic signal have failed in three years in jammu

बड़े जोशो-खरोश और लंबे-चौड़े दावों के साथ साल 2012 में शहर के 30 स्थानों पर शुरू किए गए ट्रैफिक सिगनल तीन साल में ही पस्त हो गए। 30 में से 23 गिनलों की बत्ती गुल है।

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मात्र सात ही ऐसे हैं जो कामचलाऊ तरीके से चालू बताए जा रहे हैं। अब जब दरबार की आमद का वक्त आया तो एक बार फिर इन्हें ठीक कराने की कोशिश की जा रही है, जो अभी तक किसी सिरे नहीं चढ़ी।
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ट्रैफिक लाइटों की इस दुर्दशा से त्रस्त डीआईजी ट्रैफिक अशकूर बानी का कहना है कि ‘2012 में शहर के 30 स्थानों पर लाइटें लगाईं गईं थीं। इनमें से सिर्फ सात लाइटें चल रही हैं, जबकि शेष सभी खराब हैं।’
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डीआईजी के अनुसार चूंकि ट्रैफिक लाइट्स लगाने का काम नगर निगम के अधीन हुआ था, इसलिए उन्होंने निगम को भी इस संबंध में लिखा है। इसके अलावा सरकार से मामले की जांच करवाने की सिफारिश भी की गई है।

सूत्रों की मानें तो इनके रख-रखाव पर हर साल 14-15 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं। जिस कंपनी ने मेंटीनेंस का ठेका लिया है वह अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह नाकाम रही है। आरोप है कि गुणवत्ता की अनदेखी करने और तय मानकों के मुताबिक सामग्री इस्तेमाल न किए जाने से यह हाल हो रहा है।

डीआईजी ने बताया कि कई बार दिल्ली की कंपनी को मरम्मत के लिए लिखा गया। हर साल इसके लिए 14-15 लाख रुपये का बिल बनाया जाता है। कंपनी ने अबतक दस टीमों को भेजा, लेकिन वह हाथ खड़े कर भाग गईं।

उनका कहना है कि लाइटों में उपयोग किए गए यंत्र स्तरीय नहीं हैं। बारिश होने या तेज हवा से खराब हो जाते हैं। अब दरबार जम्मू में आने वाला है। इस दौरान जम्मू में ट्रैफिक का अतिरिक्त दबाव बन जाता है।


इसलिए उन्होंने फिर सरकार और निगम को लिखा है। वर्तमान में बिक्रम चौक, सतवारी, रेलवे स्टेशन, ब्रिगेडियर राजिंद्र सिंह चौक, ग्रीन बेल्ट, ज्यूल चौक जैसे कुछ व्यस्त चौराहों पर ही लाइटें काम कर रही हैं।

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