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Trade War: कश्मीरी कालीन उद्योग पर अमेरिकी टैरिफ से छाया संकट, ऑर्डर रद्द... कामगारों की रोजी-रोटी खतरे में

Mon, 08 Sep 2025 06:49 AM IST
दुष्यंत शर्मा गौरव रावत, जम्मू
गौरव रावत, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 08 Sep 2025 06:49 AM IST
सार

अमेरिकी सरकार ने भारतीय कालीनों पर आयात शुल्क 2.9 फीसदी से बढ़ाकर 52.9 फीसदी कर दिया। इससे घाटी का पारंपरिक कालीन कारोबार गहरे संकट में फंस गया है। 

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Trade War: US tariffs put Kashmiri carpet industry in crisis, orders cancelled
file pic - फोटो : बासित जरगर

विस्तार

कश्मीर के कालीन उद्योग पर अमेरिकी टैरिफ से संकट गहराने लगा है। अमेरिकी सरकार ने भारतीय कालीनों पर आयात शुल्क 2.9 फीसदी से बढ़ाकर 52.9 फीसदी कर दिया। इससे घाटी का पारंपरिक कालीन कारोबार गहरे संकट में फंस गया है। 

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निर्यातकों का कहना है, अभी तक 5,000 डॉलर में बिकने वाले कालीन की कीमत अमेरिकी बाजार में अब 7,600 डॉलर से ज्यादा हो जाएगी।  इतना महंगा कालीन आम अमेरिकी की पहुंच से बाहर होगा। इससे मांग घटेगी, जिससे ऑर्डर में गिरावट आएगी।
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भारत से कुल कालीन निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 60 फीसदी है। 2023-24 में भारत ने 1.39 अरब डॉलर यानी करीब 16,600 करोड़ रुपये के कालीन निर्यात किए। इसमें अमेरिकी हिस्सेदारी 9,900 करोड़ रुपये के आसपास रही। वर्ष 2016-17 में जम्मू-कश्मीर से कुल 821 करोड़ रुपये का कालीन निर्यात हुआ था, जो वित्त वर्ष 2023-24 में कम होकर महज 317 करोड़ रुपये रह गया।
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ऑर्डर रद्द, कामगारों की रोजी-रोटी खतरे में
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कश्मीर में कालीन कारोबार से सीधे और परोक्ष रूप से तीन लाख से ज्यादा लोग जुड़े हैं। इनमें बुनकर, रंगाई करने वाले, डिजाइनर, व्यापारी और ट्रांसपोर्ट शामिल हैं। इस क्षेत्र से जुड़े छोटे कारोबारी बताते हैं, नए टैरिफ के बाद कई अमेरिकी ग्राहकों ने ऑर्डर रद्द कर दिए हैं। 

श्रीनगर निवासी बुनकर इम्तियाज खान कहते हैं, महीनों की मेहनत से बनने वाला कालीन अब ग्राहकों के लिए बहुत महंगा हो जाएगा। इससे हमारी कला व रोजी-रोटी, दोनों पर संकट आ गया है निर्यातक आरिफ मीर का कहना है, हमने दशकों में अमेरिकी बाजार का भरोसा जीता है। अब भारी टैरिफ से वही ग्राहक दूर हो जाएंगे। नए बाजार खोजना आसान नहीं है


सरकार से मदद की उम्मीद
व्यापारी संगठनों का कहना है, अगर जल्द राहत नहीं मिली, तो कारोबार और नीचे चला जाएगा। तुर्की और पाकिस्तान जैसे देश अमेरिकी बाजार में फायदा उठा सकते हैं। कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के चैयरमेन जाविद अहमद टेंगा ने कहा कि कश्मीर का कालीन न सिर्फ कारोबार है, बल्कि घाटी की पहचान और कारीगरी का प्रतीक भी है। लाखों लोग इसके सहारे हैं। टैरिफ ने इस कला को ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जहां से आगे का रास्ता धुंधला नजर आ रहा है। सरकार जल्द से जल्द कोई रास्ता निकाले।
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