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जम्मू-कश्मीर में इन स्थलों पर भी घूम सकते हैं अमरनाथ यात्री
संजीव दुबे, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sun, 03 Jul 2016 11:59 AM IST
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सोनमर्ग
- फोटो : File Photo
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वार्षिक श्री अमरनाथ यात्रा शुरू होने के साथ रियासत मिनी इंडिया में परिवर्तित हो चुकी है। देश के हर हिस्से से यहां पहुंचे श्रद्धालुओं को देखकर लघु भारत के दर्शन हो रहे हैं। बाबा बर्फानी की पवित्र गुफा के दर्शन करने के बाद श्रद्धालु थोड़ा वक्त निकालकर यहां के अन्य धार्मिक स्थानों के भी दर्शन लाभ ले सकते हैं।
जम्मू तो मंदिरों का शहर है। तवी पुल की बायीं ओर सर्वशक्तिमान मां महाकाली मंदिर है, जो राजा बाहुलोचन के समय के किले में स्थापित है। इस मंदिर से लगभग चार किलोमीटर दूर मां महामाया का मंदिर जंगल में विराजमान है। तवी पुल के पार रघुनाथ बाजार में उत्तर भारत का प्रसिद्ध रघुनाथ मंदिर है।
इसी मंदिर से लगभग एक किलोमीटर दूर महाराजा रणबीर सिंह द्वारा निर्मित श्री रणवीरेश्वर मंदिर है। यहां पर सात फुट के शिवलिंग, एकादश शिवलिंग के दर्शन कर श्रद्धालु धन्य हो सकते हैं।
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सूर्य पुत्री तवी किनारे पीरखो मंदिर दर्शनीय है। जम्मू से उधमपुर होते हुए पत्नीटाप और चिनैनी होते हुए शुद्ध महादेव और मानतलाई के सुंदर स्थानों पर श्रद्धालु प्राकृतिक सौंदर्य का भी आनंद ले सकते हैं।
शुद्ध महादेव मंदिर में भगवान शिव के त्रिशूल के दर्शन के साथ ही पाप नाशिनी बावली के गौरी कुंड में स्नान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि मानतलाई में भगवान शिव और मां पार्वती की शादी हुई थी। उस समय का लग्न मंडप आज भी वहां तालाब के रूप में मौजूद है।
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जम्मू तो मंदिरों का शहर है। तवी पुल की बायीं ओर सर्वशक्तिमान मां महाकाली मंदिर है, जो राजा बाहुलोचन के समय के किले में स्थापित है। इस मंदिर से लगभग चार किलोमीटर दूर मां महामाया का मंदिर जंगल में विराजमान है। तवी पुल के पार रघुनाथ बाजार में उत्तर भारत का प्रसिद्ध रघुनाथ मंदिर है।
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इसी मंदिर से लगभग एक किलोमीटर दूर महाराजा रणबीर सिंह द्वारा निर्मित श्री रणवीरेश्वर मंदिर है। यहां पर सात फुट के शिवलिंग, एकादश शिवलिंग के दर्शन कर श्रद्धालु धन्य हो सकते हैं।
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सूर्य पुत्री तवी किनारे पीरखो मंदिर दर्शनीय है। जम्मू से उधमपुर होते हुए पत्नीटाप और चिनैनी होते हुए शुद्ध महादेव और मानतलाई के सुंदर स्थानों पर श्रद्धालु प्राकृतिक सौंदर्य का भी आनंद ले सकते हैं।
शुद्ध महादेव मंदिर में भगवान शिव के त्रिशूल के दर्शन के साथ ही पाप नाशिनी बावली के गौरी कुंड में स्नान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि मानतलाई में भगवान शिव और मां पार्वती की शादी हुई थी। उस समय का लग्न मंडप आज भी वहां तालाब के रूप में मौजूद है।
जम्मू पहुंचने से पहले यहां भी जाएं
Bhadrawah
- फोटो : File Photo
पत्नीटॉप से आगे चलते हुए रामबन है। यहां से बनिहाल होते हुए जवाहर टनल तक पहुंचा जा सकता है जो पीरपंजाल के पहाड़ों को चीर कर जम्मू और कश्मीर के बीच की दूरी को कम करता है। सुरंग पार करते हुए दायीं तरफ अद्भुत सौंदर्य के दर्शन होते हैं। लोअर मुंडा होते हुए दायीं तरफ वैरीनाग, कुकरनाग जैसे सौंदर्य से भरपूर स्थल हैं।
वहां से अनंतनाग के रास्ते में पवित्र स्थल मट्टन है, जहां पिंड दान करने का अलग ही महत्व है। यहां पवित्र सरोवर है तथा यात्रियों के रहने की व्यवस्था भी रहती है।
दस किलोमीटर की दूरी पर जंगल में सीधे पहलगाम अमरनाथ यात्रा के आधार शिविर पहुंचा जा सकता है। दूसरा आधार शिविर है बालटाल। सामने जोजिला पर्वत शृंखला है। लगभग 12 किलोमीटर पहले पर्वतों के बीच सौंदर्य से भरपूर पर्यटन स्थल सोनमर्ग है।
रियासत के प्रवेश द्वार लखनपुर पर रावी नदी के पुल को पार कर बांये तरफ रणजीत डैम का विहंगम दृश्य है। यहां से 38 किलोमीटर दूर बिलावर होते हुए मां सुकराला देवी के दरबार के दर्शन किए जा सकते हैं।
प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण मंदिर सिद्ध शक्तिपीठ है। यहां से चलकर जम्मू की ओर आते हुए धार रोड पर मानसर का प्रसिद्ध एवं पवित्र स्थान है। मीलों फैली साफ पानी की झील में लाखों मछलियां और अति सुंदर स्थल पर जाकर अमरनाथ यात्री पर्यटन के साथ-साथ धार्मिक स्थल पर माथा टेक सकते हैं।
रास्ते में आगे बढ़ने पर सांबा होते हुए जम्मू आ सकते हैं। धार रोड से उधमपुर भी जा सकते हैं। सांबा के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर चीची माता का मंदिर है। यहां पूजा अर्चना कर 35 किलोमीटर का सफर तय कर जम्मू पहुंचा जा सकता है।
वहां से अनंतनाग के रास्ते में पवित्र स्थल मट्टन है, जहां पिंड दान करने का अलग ही महत्व है। यहां पवित्र सरोवर है तथा यात्रियों के रहने की व्यवस्था भी रहती है।
दस किलोमीटर की दूरी पर जंगल में सीधे पहलगाम अमरनाथ यात्रा के आधार शिविर पहुंचा जा सकता है। दूसरा आधार शिविर है बालटाल। सामने जोजिला पर्वत शृंखला है। लगभग 12 किलोमीटर पहले पर्वतों के बीच सौंदर्य से भरपूर पर्यटन स्थल सोनमर्ग है।
रियासत के प्रवेश द्वार लखनपुर पर रावी नदी के पुल को पार कर बांये तरफ रणजीत डैम का विहंगम दृश्य है। यहां से 38 किलोमीटर दूर बिलावर होते हुए मां सुकराला देवी के दरबार के दर्शन किए जा सकते हैं।
प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण मंदिर सिद्ध शक्तिपीठ है। यहां से चलकर जम्मू की ओर आते हुए धार रोड पर मानसर का प्रसिद्ध एवं पवित्र स्थान है। मीलों फैली साफ पानी की झील में लाखों मछलियां और अति सुंदर स्थल पर जाकर अमरनाथ यात्री पर्यटन के साथ-साथ धार्मिक स्थल पर माथा टेक सकते हैं।
रास्ते में आगे बढ़ने पर सांबा होते हुए जम्मू आ सकते हैं। धार रोड से उधमपुर भी जा सकते हैं। सांबा के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर चीची माता का मंदिर है। यहां पूजा अर्चना कर 35 किलोमीटर का सफर तय कर जम्मू पहुंचा जा सकता है।