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विपक्ष के दबाव में नरम हुई केंद्र सरकार, अब अलगाववादी दिखा रहे नए पैंतरे
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sun, 04 Sep 2016 12:54 AM IST
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कश्मीर के अलगाववादी नेता
- फोटो : File Photo
कश्मीर में शांति मिशन पर आ रहा सर्वदलीय समिति पर उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनाव का भी असर दिख रहा है। उत्तर प्रदेश के प्रमुख सियासी दल सपा और बसपा के प्रतिनिधि कश्मीर नहीं आ रहे हैं।
इन दलों ने सरकार और समिति के मिशन को तो समर्थन दिया है, लेकिन, प्रतिनिधि भेजना मुनासिब नहीं समझा। समिति के गठन से पहले सपा के राम गोपाल यादव और बसपा के सतीश चंद्र मिश्र के समिति में शामिल होने की संभावना व्यक्त की जा रही थी। लेकिन, समिति के सदस्यों में ये नाम शामिल नहीं हो सके।
रविवार को श्रीनगर और सोमवार को जम्मू का दौरा करने वाली समिति से मुलाकात के रियासत सरकार की ओर से न्योते भेजे जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो इसमें अलगाववादियों की दूसरी और तीसरी पंक्ति के नेताओं के नाम भी शामिल हैं। जम्मू में सर्वदलीय समिति की पीओके के शरणार्थियों से बातचीत संभव है। इस बातचीत से पीओके में पाकिस्तान के नापाक खेल को उजागर करने की रणनीति बनी है।
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इन दलों ने सरकार और समिति के मिशन को तो समर्थन दिया है, लेकिन, प्रतिनिधि भेजना मुनासिब नहीं समझा। समिति के गठन से पहले सपा के राम गोपाल यादव और बसपा के सतीश चंद्र मिश्र के समिति में शामिल होने की संभावना व्यक्त की जा रही थी। लेकिन, समिति के सदस्यों में ये नाम शामिल नहीं हो सके।
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रविवार को श्रीनगर और सोमवार को जम्मू का दौरा करने वाली समिति से मुलाकात के रियासत सरकार की ओर से न्योते भेजे जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो इसमें अलगाववादियों की दूसरी और तीसरी पंक्ति के नेताओं के नाम भी शामिल हैं। जम्मू में सर्वदलीय समिति की पीओके के शरणार्थियों से बातचीत संभव है। इस बातचीत से पीओके में पाकिस्तान के नापाक खेल को उजागर करने की रणनीति बनी है।
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गिलानी ने वार्ता करने से किया इनकार
गृहमंत्री राजनाथ सिंह
- फोटो : PTI
अलगाववादियों में सैयद अली शाह गिलानी ने पहले ही सर्वदलीय समिति से वार्ता नहीं करने का एलान कर रखा है। उदार अलगाववादी मीरवाइज उमर फारूक जेल में हैं। इसी तरह यासिन मलिक भी नजरबंद हैं। चूंकि समिति में शामिल विपक्षी दल बार-बार अलगाववादियों से मुलाकात के लिए जोर डाल रहे हैं इसलिए केंद्र सरकार ने अब इस मुद्दे पर नरम रुख अपना लिया है।
मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी सभी पक्षों से बातचीत पर जोर दिया है। अब केंद्र ने अलगाववादियों से बातचीत के लिए सूची तैयार करने से लेकर माहौल बनाने की जिम्मेदारी महबूबा पर ही सौंप दी है। पीडीपी के नेताओं की इस बात कुछ अलगाववादियों से बातचीत भी हुई है।
भाजपा सूत्रों का कहना है कि सपा और बसपा उत्तर प्रदेश चुनाव में कश्मीर के मुद्दे को उठाना चाहती है। भाजपा भी इसे अपने तरीके से उठा सकती है। सपा और बसपा में मुस्लिम वोट बैंक के लिए होड़ है।
ऐसे में कश्मीर में सर्वदलीय समिति का हिस्सा बनकर दोनों दल चुनावी मुद्दा खोना नहीं चाहते हैं। समिति में शामिल नहीं होने के चुनाव में उनके लिए केंद्र की कश्मीर नीति की आलोचना ज्यादा आसान होगी।
मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी सभी पक्षों से बातचीत पर जोर दिया है। अब केंद्र ने अलगाववादियों से बातचीत के लिए सूची तैयार करने से लेकर माहौल बनाने की जिम्मेदारी महबूबा पर ही सौंप दी है। पीडीपी के नेताओं की इस बात कुछ अलगाववादियों से बातचीत भी हुई है।
भाजपा सूत्रों का कहना है कि सपा और बसपा उत्तर प्रदेश चुनाव में कश्मीर के मुद्दे को उठाना चाहती है। भाजपा भी इसे अपने तरीके से उठा सकती है। सपा और बसपा में मुस्लिम वोट बैंक के लिए होड़ है।
ऐसे में कश्मीर में सर्वदलीय समिति का हिस्सा बनकर दोनों दल चुनावी मुद्दा खोना नहीं चाहते हैं। समिति में शामिल नहीं होने के चुनाव में उनके लिए केंद्र की कश्मीर नीति की आलोचना ज्यादा आसान होगी।
पेलेट गन के घायलों से मिल सकते हैं समिति के सदस्य
पेलेट गन से फायर करता जवान
- फोटो : File Photo
रियासत सरकार ने सर्वदलीय समिति के दौरे की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। जम्मू और श्रीनगर में 70 से अधिक लायजन अफसर नियुक्त हुए हैं।
समिति के सदस्य अस्पतालों में पेलेट गन से घायल लोगों से भी मिलना चाहते हैं। फिलहाल रियासत सरकार ने इस पर सहमति नहीं दी है। विरोध प्रदर्शनों की आशंका के मद्देनजर समिति का मूवमेंट सीमित दायरे तक केंद्रित हो सकता है।
समिति के सदस्य अस्पतालों में पेलेट गन से घायल लोगों से भी मिलना चाहते हैं। फिलहाल रियासत सरकार ने इस पर सहमति नहीं दी है। विरोध प्रदर्शनों की आशंका के मद्देनजर समिति का मूवमेंट सीमित दायरे तक केंद्रित हो सकता है।