कश्मीर में सियासी नेताओं और सरकार के मंत्रियों पर आतंकी हमले का खतरा
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सेना और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से बौखलाए आतंकी संगठनों ने सियासी नेताओं को निशाना बनाने की साजिश रची है। इससे मंत्रियों और विधायकों पर आतंकी हमले का खतरा मंडराने लगा है। सुरक्षा बलों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक आतंकी संगठनों की साजिश के बारे में इनपुट मिलने के बाद सतर्कता बढ़ाई गई है।
पुलिस ने मंत्रियों और विधायकों की सुरक्षा की समीक्षा की है। आतंकी संगठनों ने साफ्ट टारगेट के तहत अब सैन्य शिविरों और सुरक्षा बलों के कैंपों के बजाय सियासी नेताओं को निशाना बनाकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की साजिश रची है। बौखलाए आतंकी संगठन पूर्व मंत्रियों और विधायकों को भी निशाना बना सकते हैं।
हिजबुल मुजाहिदीन ने फिलहाल सियासी दलों के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाना शुरू किया है। एक सप्ताह में पीडीपी के दो कार्यकर्ताओं की हत्या की जा चुकी है। पूर्व पंचों और सरपंचों पर अभी और हमलों की आशंका है। आतंकी संगठनों के ओवर ग्राउंड वर्कर सियासी कार्यकर्ताओं को इस्तीफे के लिए धमकी दे रहे हैं। दक्षिणी कश्मीर में आतंकियों द्वारा दो कार्यकर्ताओं को मस्जिद में बुलाकर धमकी दी गई।
आतंकी संगठनों द्वारा बड़े हमले की हर साजिश नाकाम
अमरनाथ यात्रियों पर हमले के बाद से अब तक आतंकी संगठनों द्वारा बड़े हमले की हर साजिश नाकाम रही है। सुरक्षा बलों के आपरेशन ऑलआउट में आतंकी संगठनों हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा के अधिकांश टाप कमांडर मारे जा चुके हैं।
पूरे कश्मीर में कासो के तहत घर-घर सर्च आपरेशन के बाद आतंकियों को जंगलों में भागना पड़ा है। अनुच्छेद 35 ए पर जारी घमासान के बीच अलगाववादियों ने अपने प्रचार तंत्र से ग्रामीण इलाकों में सत्ताधारी गठबंधन के खिलाफ माहौल बनाने में कुछ हद तक सफलता हासिल कर ली है। इससे आतंकियों को ग्रामीणों का संरक्षण बढ़ने लगा है।
टेरर फंडिंग में अलगाववादियों पर एनआईए के शिकंजे के बाद ग्रामीण इलाकों में मुठभेड़ के दौरान पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी आने लगी थी, लेकिन अब एक बार फिर से यह खतरा बढ़ने लगा है।
सुरक्षा बलों के मुखबिर होने की शक पर हो रही हत्याएं