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Jammu Alert: जम्मू में भूस्खलन का खतरा बरकरार, दो सितंबर तक ऑरेंज अलर्ट; चार दिन बाद जम्मू-श्रीनगर हाईवे खुला
Sun, 31 Aug 2025 11:07 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 31 Aug 2025 11:07 AM IST
सार
जम्मू संभाग में बारिश और भूस्खलन का खतरा बरकरार है। दो सितंबर तक ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन, एनएचएआई, लोक निर्माण विभाग, जलशक्ति और बिजली विभाग को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
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जम्मू-कश्मीर में भूस्खलन
- फोटो : एएनआई
विस्तार
जम्मू संभाग में बारिश के कहर से अभी राहत नहीं मिलेगी। मौसम विभाग ने अब दो सितंबर तक भारी बारिश और भूस्खलन का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसका सबसे ज्यादा असर जम्मू संभाग पर रहेगा।
स्थानीय प्रशासन समेत लोक निर्माण विभाग, जलशक्ति और बिजली विभाग को तैयार रहने के लिए कहा गया है। ऑरेंज अलर्ट का असर कश्मीर संभाग में नहीं होगा। हालांकि यहां बादल छाए रहने और हल्की बारिश की संभावना है।
कटड़ा में भूस्खलन के बाद से माता वैष्णो देवी यात्रा स्थगित है। श्राइन बोर्ड ने कटड़ा में रुके यात्रियों को वापस लौटने या घरों से न निकलने की सलाह दी है। कठुआ, सांबा, जम्मू, पुंछ, राजोरी, उधमपुर, रियासी, रामबन, डोडा और किश्तवाड़ में भारी बारिश के आसार हैं। यहां बाढ़ आने, भूस्खलन और चट्टानें खिसकने की घटनाएं हो सकती हैं।
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जम्मू में हल्की बूंदाबांदी
शनिवार को प्रदेश के कई हिस्सों में दिनभर बादल छाए रहे। जम्मू समेत कई जगह हल्की बूंदाबांदी हुई। आगामी दिनों में मैदानी इलाकों में बाढ़ की संभावना है। लोगों को नदी-नालों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
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स्थानीय प्रशासन समेत लोक निर्माण विभाग, जलशक्ति और बिजली विभाग को तैयार रहने के लिए कहा गया है। ऑरेंज अलर्ट का असर कश्मीर संभाग में नहीं होगा। हालांकि यहां बादल छाए रहने और हल्की बारिश की संभावना है।
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कटड़ा में भूस्खलन के बाद से माता वैष्णो देवी यात्रा स्थगित है। श्राइन बोर्ड ने कटड़ा में रुके यात्रियों को वापस लौटने या घरों से न निकलने की सलाह दी है। कठुआ, सांबा, जम्मू, पुंछ, राजोरी, उधमपुर, रियासी, रामबन, डोडा और किश्तवाड़ में भारी बारिश के आसार हैं। यहां बाढ़ आने, भूस्खलन और चट्टानें खिसकने की घटनाएं हो सकती हैं।
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जम्मू में हल्की बूंदाबांदी
शनिवार को प्रदेश के कई हिस्सों में दिनभर बादल छाए रहे। जम्मू समेत कई जगह हल्की बूंदाबांदी हुई। आगामी दिनों में मैदानी इलाकों में बाढ़ की संभावना है। लोगों को नदी-नालों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
अति आवश्यकता होने पर ही यात्रा पर जाने की सलाह दी गई है, लेकिन इससे पहले मौसम और सड़क की जानकारी लेने के लिए कहा गया है। वहीं, मौसम विभाग ने एनएचएआई को भी पहले से ही तैयार रहने की सलाह दी है।
कहां कितना तापमान (डिग्री सेल्सियस में)
कठुआ - 33.8
जम्मू - 33.2
श्रीनगर - 30.7
कुपवाड़ा - 30.7
काजीगुंड - 30.2
कटड़ा - 29.3
बनिहाल - 29.4
बटोट - 26.5
पहलगाम - 26.4
गुलमर्ग - 20.0
कठुआ - 33.8
जम्मू - 33.2
श्रीनगर - 30.7
कुपवाड़ा - 30.7
काजीगुंड - 30.2
कटड़ा - 29.3
बनिहाल - 29.4
बटोट - 26.5
पहलगाम - 26.4
गुलमर्ग - 20.0
चार दिन बाद जम्मू-श्रीनगर हाईवे खुला, दो हजार वाहनों को मिली मंजिल
जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे को एनएचएआई ने बहाल कर दिया है। हाईवे-44 पर करीब 72 घंटों से फंसे दो हजार वाहन श्रीनगर और जम्मू के लिए रवाना हो गए हैं। एनएचएआई ने भूस्खलन संभावित क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है और भारी मशीनों को तैनात कर दिया है।
जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे को एनएचएआई ने बहाल कर दिया है। हाईवे-44 पर करीब 72 घंटों से फंसे दो हजार वाहन श्रीनगर और जम्मू के लिए रवाना हो गए हैं। एनएचएआई ने भूस्खलन संभावित क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है और भारी मशीनों को तैनात कर दिया है।
बीते दिनों कई स्थानों पर भूस्खलन से हाईवे पर आवाजाही बंद थी। सबसे ज्यादा असर उधमपुर, रामबन और बनिहाल के बीच पड़ा था। 26 अगस्त को भारी बारिश से यहां सड़क का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया था। इससे प्रशासन ने हाईवे पर आवाजाही को रोक दिया था। इसके बाद उधमपुर से रामबन के बीच करीब दो हजार वाहन फंस गए थे।
एनएचएआई ने रामबन-बनिहाल को बहाल करने के लिए रातभर हाईवे पर काम किया। काम पूरा कर सभी वाहनों के लिए इसे खोल दिया गया। बली नाला में बंद यातायात को शुक्रवार देर शाम बहाल कर हल्के वाहनों को गुजरने की इजाजत दी थी। यहां दोबारा भूस्खलन होने पर यातायात बंद कर दिया था। मरम्मत कर हल्के वाहनों को आवाजाही की मंजूरी दी है।
हाईवे पर यातायात शुरू कर दिया है। एनएचएआई की टीम ने हाईवे को जल्द से जल्द बहाल करने का हर संभव प्रयास किया। यातायात सुरक्षित रूप से दोबारा चालू कर दिया है। यात्रियों को सलाह है कि वे मौसम की जानकारी जुटाकर यात्रा शुरू करें। किसी भी आकस्मिक स्थिति के बारे में नियंत्रण कक्ष से संपर्क करें।-आरएस यादव, क्षेत्रीय अधिकारी, एनएचएआई