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जानिए, गुलाम हुसैन के लिए क्यों मनहूस होगी ईद
राजेश विद्यार्थी/अमर उजाला, उधमपुर
Updated Sun, 05 Oct 2014 10:40 PM IST
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छह सितंबर को भूस्खलन के कारण परिवार के छह लोगों की मौत का दर्द सह रहे गुलाम हुसैन और मो. शफी के परिवार की ईद भी इस साल सुनी रह गई। सभी लोग आज सोमवार को ईद मना रहे होंगे और गुलाम हुसैन अपने परिवार के छह सदस्यों की मौत का एक महीना होने पर शोक मना रहा होगा।
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हादसे के एक महीने के बाद भी अभी उनके टूटे हुए घर और गुजर-बसर की सुध लेने के लिए कोई अधिकारी नहीं पहुंचा है। नुकसान का आंकलन भी नहीं हुआ और गैर सरकारी संगठन द्वारा मुहैया कराए टेंट में जिंदगी काटने को पूरा परिवार मजबूर है। खुले आसमान के नीचे खाना बनाने और टेंट में ही रात गुजारने को मजबूर परिवार को अब भी सरकारी मदद की दरकार है। बच्चे भी टेंट में रात गुजार रहे हैं और दिन को अपनी पढ़ाई कर रहे हैं।
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जिले से बीस किलोमीटर दूर दो किलोमीटर पहाड़ी पैदल रास्ते पर मौजूद ढोक गुजरां में छह सितंबर रात तीन बजे मूसलाधार बारिश के कारण भूस्खलन हुआ और पक्के मकान के नीचे छह लोग दब गए। गुलाम हुसैन के अनुसार हाल ही मेें उन्होंने पक्का मकान बनाया था। साथ ही कच्चा मकान था। बारिश के कारण मो. शफी की मां, बहन, दो बेटियां और मो. युनूस के दो बेटियां दब गईं।
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इसके बाद प्रशासन के लोग आए, लेकिन वे भी केवल सड़क तक पहुंचे। दो किलोमीटर नीचे जाकर मृतकों के लिए डेढ़-डेढ़ लाख रुपये के चेक मिले, लेकिन उन्हें टूटे मकान, मवेशी, सामान आदि का आकलन करने के लिए कोई भी पहाड़ी तक नहीं पहुंचा। प्रशासन की तरफ से उन्हें राशन तक नहीं मिला।
टेंट और तिरपाल भी नहीं मिले। हालांकि कुछ गैरसरकारी संगठनों ने उन्हें टेंट और राशन दिया। अब एक महीना बीत गया है। उसके बाद कोई भी उनके पास नहीं पहुंचा। परिवार अभी भी शोक संताप से उबर नहीं सका है। खाने के भी लाले पड़े हैं। गरीब परिवार के लोग दिहाड़ी लगाएं या फिर घर बनाए। बस इसी काम में पूरा परिवार जुटा हुआ है।