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नए सियासी मोर्चे के लिए अब घाटी में ग्राउंड पर खड़ा होगा नेटवर्क, उप राज्यपाल से मिला आठ सदस्यीय दल

Wed, 08 Jan 2020 08:09 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: Pranjal Dixit Updated Wed, 08 Jan 2020 08:09 PM IST
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third front in jammu kashmir met lt governor girish chandra murmu
नेशनल कांफ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के सामने वजूद में आ सकता है तीसरा मोर्चा - फोटो : सोशल मीडिया

कश्मीर घाटी में आम लोगों की आवाज बनने के लिए नए सियासी मोर्चे की तैयारियों के बीच उप राज्यपाल से मिलकर पूर्व विधायकों का आठ सदस्यीय दल बुधवार को श्रीनगर लौट गया है। यह दल अब वहां के आम लोगों तथा विभिन्न राजनीतिक धड़े के लोगों से रायशुमारी कर मोर्चे को अमली जामा पहनाएगा। साथ ही ग्राउंड पर इसका नेटवर्क खड़ा करेगा। 

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जम्मू में भी इस मोर्चे को मूर्त रूप देने के लिए जमीन की तलाश चल रही है। इसके लिए यहां के लोगों से भी संपर्क  साधा गया है। उप राज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू से मिलने के लिए यह दल पिछले पांच दिन से जम्मू में रहकर अपने साथ यहां के लोगों को जोड़ने की कोशिशों में जुटा था।
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फिलहाल, नए सियासी मोर्चे का नाम तय नहीं हुआ है लेकिन इसमें पीडीपी से नाराज लोगों के अलावा अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को जोड़ने की कोशिशें चल रही हैं। बताते हैं कि यह दल घाटी में जाकर लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए काम करेगा। 
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इस बीच यह भी चर्चा जोरों पर है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली के तहत एमएलए हॉस्टल में बंद कुछ और नेताओं को सरकार जल्द रिहा कर सकती है। इसके जरिए आम कश्मीरियों में यह संदेश दिया जा सकेगा कि इस ग्रुप की पहल पर ही हिरासत में चल रहे नेताओं को रिहा कर छोड़कर विश्वास बहाली की पहल की गई है। 

मोर्चे का गठन प्रारंभिक स्तर पर: अल्ताफ बुखारी

एलजी से मिलने वाले इस ग्रुप में शामिल पूर्व मंत्री अल्ताफ बुखारी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के ज्वलंत मुद्दों के समाधान के लिए अगर उन्हें किसी नए मोर्चे के गठन की जरूरत पड़ती है तो इस विकल्प पर काम किया जा सकता है। अभी यह प्रारंभिक स्तर पर है। हमारी प्राथमिकता है कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल कराने के साथ-साथ अन्य जायज मांगों को पूरा करवाया जाए। हमारे साथ विभिन्न वर्गों के लोग जुड़े हुए हैं।

अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के बाद जम्मू-कश्मीर के लोगों में जो अस्थिरता की स्थिति है, उसे दूर करना पहला मकसद है। अगर कभी सैलाब आ जाता है तो उस पर उम्र भर रोया नहीं जाता, बल्कि अपने टूटे हुए भवन का दोबारा निर्माण करने पर सोचा जाता है। हमें आगे की ओर चलने की जरूरत है। अनुच्छेद 370 का मामला न्यायालय में विचाराधीन है। हम सभी लोगों की राय लेकर चलेंगे।

सबकी राय ली जाएगी: गुलाम हसन मीर

पूर्व कृषि मंत्री गुलाम हसन मीर ने कहा कि सरकार को हिरासत में लिए गए और नजरबंद नेताओं को जल्द से जल्द छोड़ना चाहिए। उनकी भी राय ली जाएगी। गत 5 अगस्त को तूफान आया था, जिसमें कई व्यवस्थाएं तहस-नहस हुई हैं। उम्मीद है आगे कुछ पुराने भवनों के साथ नए भवन भी बनेंगे। 

अफसरशाही उचित विकल्प नहीं: जफर
पूर्व एमएलसी जफर इकबाल का कहना है कि राजनीतिक संस्थान का अफसरशाही उचित विकल्प नहीं हो सकती है। जेलों में डाले गए और नजरबंद राजनेताओं को रिहा किया जाने से इस पर बात आगे बढ़ सकती है।

लोकतांत्रिक व्यवस्था जल्द हो बहाल: कमर
पूर्व विधायक चौधरी कमर हुसैन ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को शीघ्र बहाल किया जाना चाहिए। ऐसा होने पर आगामी चुनाव में सभी राजनीतिक दलों के नेता मैदान में रहेंगे।  

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