क्या दिवाली पर हम कम कर सकते हैं प्रदूषण?
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इस बार भी पटाखों की आवाज से दिवाली पर वायु और ध्वनि प्रदूषण का रिकार्ड टूटेगा, क्योंकि पिछले कई साल के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो दिवाली पर हमेशा पटाखों की आवाज से ध्वनि प्रदूषण का स्तर सामान्य से ज्यादा दर्ज किया गया है।
बिक्रम चौक, सतवारी चौक, ज्यूल और परेड चौक में सबसे ज्यादा शोरगुल रहता है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हर साल की तरह वायु और ध्वनि प्रदूषण की मानीटरिंग करने के लिए कमर कस ली है।
गौरतलब है कि दिवाली को मात्र छह दिन बाकी रह गए हैं। बाजारों में रौनक अभी कम है, लेकिन बाजार सजने लगे हैं। अन्य सामान की खरीदारी के साथ-साथ पटाखों की खरीदारी के लिए भी लोग तैयार हो गए हैं। बीस अक्तूबर के बाद शहर के चयनित स्थानों पर पटाखों के स्टाल लग जाएंगे।
बिक्रम चौक, सतवारी और परेड में सबसे ज्यादा शोर
इस दौरान पटाखों से होने वायु और प्रदूषण को मापने के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तैयार हो गया है। बोर्ड दावा करता है कि लोगों को पटाखे कम चलाने के लिए जागरूक किया जाता है, लेकिन दिवाली वाले दिन सभी दावे खोखले हो जाते हैं।
पिछले साल के आंकड़ों में पटाखों की आवाज से वातावरण खूब शोरगुल हुआ। जाहिर है कि कमजोर दिल और हृदय रोगियों को इस बार भी पटाखों की धमक से कठिनाई हो सकती है।
फिर पटाखों के निकलने वाले जहरीले धुएं, सल्फर डायआक्साइड और नाइट्रोजन डायआक्साइड गैसें से भी दमे के मरीजों तथा लोगों को एलर्जी जैसी समस्या आ सकती है। इस बार भी लोगों के जागरूक होने की जरूरत है कि वे पटाखे कम से कम चलाएं, ताकि सभी लोग खुशी-खुशी दिवाली का त्योहार मना सके।