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एस्टेट विभाग की लापरवाही से पड़ा 33 करोड़ का अतिरिक्त बोझ

Wed, 29 Jun 2016 09:28 PM IST
एजेंसी/श्रीनगर
एजेंसी/श्रीनगर Updated Wed, 29 Jun 2016 09:28 PM IST
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The State Department had casually additional burden of 33 million
कैग - फोटो : File Photo
महानियंत्रक एवं लेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में एस्टेट विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए गए हैं। कैग ने जांच में पाया कि एस्टेट विभाग ने नियमों का पालन नहीं किया जिसकी वजह से सरकारी कोष पर 33 करोड़ रूपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा। इस राशि को बचाया जा सकता था।
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रिपोर्ट में एस्टेट विभाग की कार्यप्रणाली के साथ साथ 55 विधायकों द्वारा नियमों के उल्लंघन को भी प्रमुखता से रेखांकित किया गया है। इन विधायकों ने सरकारी आवास सुविधा का लाभ उठाने के बावजूद एमएलए हॉस्टल में अपना कब्जा बनाए रखा। 
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कैग रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2010-11 से 2014-15 के दौरान आवास आवंटन नियमों के उल्लंघन की वजह से 19.02 करोड़ रूपये का अतिरिक्त खर्च सरकार को वहन करना पड़ा। इसी तरह से निजी होटलों और आवासोें में अनाधिकृत रूप से कब्जे बने रहने से सरकार को 13.95 करोड़ रूपये का खर्च सरकार को उठाना पड़ा।
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आडिट पड़ताल में पाया गया कि विधान परिषद के चेयरमैन, मंत्रियों सहित 55 विधायकों को एस्टेट विभाग ने जम्मू और श्रीनगर शहरों में सरकारी आवास की सुविधा फरहाम की। जबकि इस दौरान उनके पास सचिवालय द्वारा दी गई जम्मू और श्रीनगर एमएलए हॉस्टल की सुविधा भी रही। बावजूद इसके कि नियमों के अनुसार एक ही समय पर दो आवास सुविधाएं नहीं दी जा सकतीं।

दो विधायकों को एस्टेट विभाग के साथ-साथ कस्टोडियन विभाग ने भी आवास सुविधा दी है। रिपोर्ट के अनुसार 146 सरकारी क्वार्टर की सुविधा ऐसे लोगों को दी गई है जो इसके लिए वे अधिकृत नहीं है।


इनमें रिटायर्ड कर्मचारी, मृतक अलाटी के परिजन, पूर्व विधायक शामिल हैं जो सुविधा छोड़ने के लिए निर्धारित अवधि पूरी होने के बावजूद सरकारी आवास का लाभ लेते पाए गए हैं। इनमें 25 क्वार्टर पूर्व विधायकों के पास हैं, जबकि 110 रिटायर्ड अलाटी और 11 क्वार्टर मृतक अलाटी के नाम से उनके परिजनों के पास हैं।
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