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बगैर चर्चा बजट प्रस्ताव लागू करने पर विधानसभा में हंगामा
ब्यूरो, अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Thu, 02 Jun 2016 12:07 PM IST
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- फोटो : FILE
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सदन में चर्चा के बगैर बजट प्रस्तावों को लागू करने का आदेश जारी करने पर सरकार को चौतरफा विरोध झेलना पड़ा। सदन की कार्यवाही शुरू होने पर पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बजट प्रस्तावों को लागू करने के फैसले को सदन की अवमानना करार देकर बहस शुरू की।
इसके बाद कांग्रेस ने भी जोरदार विरोध किया। मामला तब और दिलचस्प हो गया जब सत्ता पक्ष से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और विधायक सत शर्मा ने फैसले का खुलकर विरोध जताते हुए विपक्ष की दलीलों का खुलकर समर्थन किया।
स्पीकर कवींद्र गुप्ता ने सरकार को प्रस्ताव लागू करने के आदेश को वापस लेने का निर्देश दिया। वित्त मंत्री हसीब द्राबू ने तर्क दिया कि यह नई रिवायत नहीं है। राज्य और केंद्र में बजट प्रस्तुतिकरण के तुरंत बाद बजट प्रस्तावों की अधिसूचना जारी की जाती है। इसके बावजूद यदि सदस्य इससे असहज हैं तो प्रस्तावों को होल्ड पर रखने का आदेश जारी होगा।
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बुधवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई ही थी कि सत्तापक्ष को घेरने उठे उमर ने कहा हम जानते हैं आपके पास संख्याबल है। बजट प्रस्तावों को पारित भी करवा लिया जाएगा। लेकिन, संख्याबल के बूते सत्तापक्ष सदन का मजाक नहीं बना सकता है।
अभी बजट पर चर्चा जारी है। सदन में प्रस्ताव रखने का मतलब सहमति बनाना होता है, लेकिन, यहां पर तो चर्चा से पहले ही प्रस्तावों को लागू करने के आदेश किए जा रहे हैं। विपक्ष से भी तो कोई बेहतर सुझाव आ सकता है।
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इसके बाद कांग्रेस ने भी जोरदार विरोध किया। मामला तब और दिलचस्प हो गया जब सत्ता पक्ष से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और विधायक सत शर्मा ने फैसले का खुलकर विरोध जताते हुए विपक्ष की दलीलों का खुलकर समर्थन किया।
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स्पीकर कवींद्र गुप्ता ने सरकार को प्रस्ताव लागू करने के आदेश को वापस लेने का निर्देश दिया। वित्त मंत्री हसीब द्राबू ने तर्क दिया कि यह नई रिवायत नहीं है। राज्य और केंद्र में बजट प्रस्तुतिकरण के तुरंत बाद बजट प्रस्तावों की अधिसूचना जारी की जाती है। इसके बावजूद यदि सदस्य इससे असहज हैं तो प्रस्तावों को होल्ड पर रखने का आदेश जारी होगा।
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बुधवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई ही थी कि सत्तापक्ष को घेरने उठे उमर ने कहा हम जानते हैं आपके पास संख्याबल है। बजट प्रस्तावों को पारित भी करवा लिया जाएगा। लेकिन, संख्याबल के बूते सत्तापक्ष सदन का मजाक नहीं बना सकता है।
अभी बजट पर चर्चा जारी है। सदन में प्रस्ताव रखने का मतलब सहमति बनाना होता है, लेकिन, यहां पर तो चर्चा से पहले ही प्रस्तावों को लागू करने के आदेश किए जा रहे हैं। विपक्ष से भी तो कोई बेहतर सुझाव आ सकता है।
उमर ने स्पीकर से कहा, आपकी जिम्मेदारी है सदन की गरिमा बनाए रखना
विधानसभा में बोलते उमर अब्दुल्ला
- फोटो : Amar Ujala
उमर ने विधानसभा अध्यक्ष कवींद्र गुप्ता से मुखातिब होकर कहा आप हमेशा सत्तापक्ष के साथ नहीं चल सकते। आपकी पहली जिम्मेदारी सदन की गरिमा बनाए रखना है।
कांग्रेस से नवांग रिगजिन जोरा ने बजट प्रस्तावों पर अमल के आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा यह कैसी समझदारी है कि चर्चा चल रही है और सदन ने अपनी मंजूरी नहीं दी है लेकिन सरकार ने एक तरफा निर्णय लेते हुए इस पर अमल के आदेश जारी कर दिए। भाजपा से सतपाल शर्मा ने कहा विपक्षी दोस्तों के तर्क सही हैं। आदेश को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा भले ही केंद्र में ऐसा होता हो, लेकिन, जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्राप्त है। यहां पर संसद द्वारा पारित प्रस्ताव और कानून लागू करने से पूर्व राज्य विधानसभा में विस्तार से बहस की जाती है।
एसआरओ लागू करने के मुद्दे पर मुख्य विपक्षी दल नेकां के तमाम सदस्यों ने विधान परिषद में भी खूब विरोध जताया। परिषद में नेकां सदस्य अली मोहम्मद डार ने कहा जब बजट प्रस्ताव का एसआरओ जारी हो गया है तो चर्चा करने का औचित्य ही क्या है।
कांग्रेस से नवांग रिगजिन जोरा ने बजट प्रस्तावों पर अमल के आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा यह कैसी समझदारी है कि चर्चा चल रही है और सदन ने अपनी मंजूरी नहीं दी है लेकिन सरकार ने एक तरफा निर्णय लेते हुए इस पर अमल के आदेश जारी कर दिए। भाजपा से सतपाल शर्मा ने कहा विपक्षी दोस्तों के तर्क सही हैं। आदेश को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा भले ही केंद्र में ऐसा होता हो, लेकिन, जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्राप्त है। यहां पर संसद द्वारा पारित प्रस्ताव और कानून लागू करने से पूर्व राज्य विधानसभा में विस्तार से बहस की जाती है।
एसआरओ लागू करने के मुद्दे पर मुख्य विपक्षी दल नेकां के तमाम सदस्यों ने विधान परिषद में भी खूब विरोध जताया। परिषद में नेकां सदस्य अली मोहम्मद डार ने कहा जब बजट प्रस्ताव का एसआरओ जारी हो गया है तो चर्चा करने का औचित्य ही क्या है।