घाटी में भारत विरोधी अभियान के जोर पकड़ने का खतरा
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अलग-अलग गुटों में बंटे हुर्रियत और अलगाववादियों के हाथ मिलाने से घाटी में एक बार फिर भारत विरोधी अभियान के जोर पकड़ने का खतरा उत्पन्न हो गया है।
लंबे समय बाद गिलानी, यासीन मलिक और मीरवाइज ने हाथ मिलाते हुए भारत के खिलाफ जहर उगलना शुरू कर दिया है। इसके लिए युवाओं तथा महिलाओं को टारगेट किया जा रहा है।
उन्हें भारत के खिलाफ भड़काकर कश्मीर की आजादी के लिए लड़ाई लड़ने की साजिश रची जा रही है। अलगाववादियों की एकता से एक बार फिर घाटी का माहौल बिगड़ने की आशंका है।
कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास की घोषणा और गिलानी की रैली के बाद अलगाववादियों की घाटी में सक्रियता बढ़ी है।
'भारत ने जबरन इस हिस्से पर कब्जा कर रखा है'
वे अलग-अलग इलाकों में कश्मीरियों को एकजुट करने में जुटे हैं। उन्हें यह समझाने की कोशिश की जा रही है कि जम्हूरियत से कुछ मिलने वाला नहीं है। यदि खुशहाल होना है तो कश्मीर की आजादी जरूरी है।
इसके लिए सभी को साथ लड़ना होगा। कश्मीरियों में यह जहर भरने की भी कोशिश हो रही है कि भारत ने जबरन इस हिस्से पर कब्जा कर रखा है। इससे मुक्ति के लिए आजादी की लड़ाई लड़नी होगी।
कुछ दिनों पहले गिलानी की रैली में पाकिस्तानी झंडे लहराने और पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाने की घटना के बाद सोमवार को हुर्रियत नेता गिलानी एवं मीरवाइज तथा जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक साथ-साथ नारबल पहुंचे थे।
युवाओं को भड़काया और मार्च निकाला
यहां पर इन अलगवावादियों ने पुलिस फायरिंग में मारे गए युवक की मौत पर दुख व्यक्त करने के बाद वहां मौजूद युवाओं एवं महिलाओं को कश्मीर की आजादी के लिए भड़काया।
मार्च भी निकाला। हुर्रियत और अलगाववादियों के एक प्लेटफार्म पर आने की खबर के बाद राज्य मशीनरी ने सुरक्षा एजेंसियों को चौकन्ना रहने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही इनकी गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखने को कहा गया है। घाटी में सभी अलगाववादियों के घरों के बाहर खुफिया तंत्र का जाल बिछाने के साथ ही उनसे मिलने जुलने वालों पर नजर रखी जा रही है।
हालांकि, राज्य सरकार का दावा है कि ऐसी किसी भी राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को सख्ती से कुचला जाएगा।