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सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए BSF ने बनाई नई रणनीति
ब्यूरो, अमर उजाला/कठुआ
Updated Thu, 28 Apr 2016 07:21 PM IST
सार
- सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए लेजर बीम लगाने की तैयारी
- घुसपैठ के रूट माने जाने वाले नालों में होगी प्रयोग
- बीएसएफ के अधिकारियों ने कुछ दिन पहले इलाके का सर्वेक्षण भी किया था
- बीते ढाई साल में कठुआ जिला तीन बड़े आतंकी हमलों का शिकार हुआ
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सीमा पर गश्त करते बीएसएफ जवान
- फोटो : FILE PHOTO
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विस्तार
आतंकियों के घुसपैठ का रूट माने जाने वाले हीरानगर सेक्टर के विभिन्न दरियाई नालों पर लेजर बीम की मदद लेने की तैयारी की जा रही है।
भारत पाक अंतराष्ट्रीय सीमा से होकर पाकिस्तान की ओर जाने वाले दरियाई नालों में किसी भी हलचल को भांपने के लिए इस तकनीकि का सहारा लिया जाएगा। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पूर्व में आतंकियों के लिए घुसपैठ का आसान रूट समझे जाने वाले छाप, भाग और तरनाह नाले में लेजर बीम का प्रयोग करने की योजना है।
ऐसा इसलिए भी महत्वपूर्ण है चूंकि हर साल बरसात के दिनों में बाढ़ से जहां तारबंदी को नुकसान पहुंचता था वहीं दरियाई नालों में पहरा बढ़ाना भी बड़ी सिरदर्दी थी। इन नालों की बनावट कुछ इस तरीके से रही है कि न चाहते हुए भी घुसपैठ को रोक पाना एक बड़ी मशक्कत थी। लेकिन लेजर बीम की मदद से सीमा पर होने वाली किसी भी तरह की हलचल को भांपना आसान होगा।
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भारत पाक अंतराष्ट्रीय सीमा से होकर पाकिस्तान की ओर जाने वाले दरियाई नालों में किसी भी हलचल को भांपने के लिए इस तकनीकि का सहारा लिया जाएगा। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पूर्व में आतंकियों के लिए घुसपैठ का आसान रूट समझे जाने वाले छाप, भाग और तरनाह नाले में लेजर बीम का प्रयोग करने की योजना है।
ऐसा इसलिए भी महत्वपूर्ण है चूंकि हर साल बरसात के दिनों में बाढ़ से जहां तारबंदी को नुकसान पहुंचता था वहीं दरियाई नालों में पहरा बढ़ाना भी बड़ी सिरदर्दी थी। इन नालों की बनावट कुछ इस तरीके से रही है कि न चाहते हुए भी घुसपैठ को रोक पाना एक बड़ी मशक्कत थी। लेकिन लेजर बीम की मदद से सीमा पर होने वाली किसी भी तरह की हलचल को भांपना आसान होगा।
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कठुआ जिले में बीते ढाई साल में तीन आतंकी हमले
सीमा पर तैनात बीएसएफ जवान
- फोटो : FILE PHOTO
बारिश, घने कोहरे, आंधी और तूफान के समय भी लेजर बीम सीमा पर घुसपैठ के नाकाम मंसूबों को रोकने में कारगर साबित हो सकती है। इस संबंध में बीएसएफ के अधिकारियों ने कुछ दिन पहले इलाके का सर्वेक्षण भी किया था।
उल्लेखनीय है कि बीते ढाई साल में कठुआ जिला तीन बड़े आतंकी हमलों का शिकार हुआ है। ऐसा माना जाता रहा है कि सीमावर्ती इलाकों से रात के समय घुसपैठ कर आतंकी हमले को अंजाम देते रहे हैं।
बीते कुछ महीनों से सीमा पर पहरा कड़ा रहने से हीरानगर सेक्टर से घुसपैठ कर पाना आतंकियों के लिए मुश्किल हो गया है। लेकिन लगातार जारी हो रही खूफिया इनपुट के अनुसार सीमापार घुसपैठ को साजिशें रची जा रही हैं। ऐसे में दरियाई रूट को महफूज करने के साथ सभी संभावनाओं पर विराम लगा पाना संभव हो पाएगा।
उल्लेखनीय है कि बीते ढाई साल में कठुआ जिला तीन बड़े आतंकी हमलों का शिकार हुआ है। ऐसा माना जाता रहा है कि सीमावर्ती इलाकों से रात के समय घुसपैठ कर आतंकी हमले को अंजाम देते रहे हैं।
बीते कुछ महीनों से सीमा पर पहरा कड़ा रहने से हीरानगर सेक्टर से घुसपैठ कर पाना आतंकियों के लिए मुश्किल हो गया है। लेकिन लगातार जारी हो रही खूफिया इनपुट के अनुसार सीमापार घुसपैठ को साजिशें रची जा रही हैं। ऐसे में दरियाई रूट को महफूज करने के साथ सभी संभावनाओं पर विराम लगा पाना संभव हो पाएगा।