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हंदवाड़ा मामले पर सरकार से उच्च न्यायालय ने मांगा जवाब
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Wed, 20 Apr 2016 10:57 PM IST
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हंडवाड़ा में हुई थी हिंसा
- फोटो : PTI
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हंदवाड़ा में कथित तौर पर छेड़छाड़ की घटना और उसके बाद हुई हिंसा में उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग की एक जनहित याचिका पर जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। साथ ही लड़की की मां से उसकी और उसके पिता की मुलाकात 26 अप्रैल से पहले करवाने के पुलिस को निर्देश दिए हैं।
कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से दायर जनहित याचिका में हंदवाड़ा में कथित तौर से सेना के जवान पर एक लड़की के साथ छेड़छाड़ के बाद भड़की हिंसा और उस दौरान मारे गए 5 स्थानीय निवासियों के मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग की है।
जस्टिस अली मोहम्मद माग्रे और जस्टिस ताशी राबस्तान की की खंडपीठ के सामने बार अध्यक्ष मियां क्यूम ने डीविजन बैंच के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि हंदवाड़ा कहा कि मामले को दबाया जा रहा है। जिला मैजिस्ट्रेट ने अधिकार न होने के बावजूद अतिरिक्त जिला उपायुक्त को मैजिस्ट्रेट जांच के लिए कहा है। इस मामले में स्वयं एक पक्ष होने के बावजूद संबधित थाना प्रभारी ने भी जांच शुरू कर दी है।
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याचिका में आरोप लगाया गया कि पीड़ित छात्रा से जबरन बयान दिलाया गया और सेना को पहले ही क्लीन चिट दे दी गई। लिहाजा हाईकोर्ट के वर्तमान जज से मामले की न्यायिक जांच करवाई जाए। आईजीपी कश्मीर के नेतृत्व में विशेष जांच दल बनाया जाए जो मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच करे। खंडपीठ ने दलीलें सुनने के बाद राज्य सरकार को न्यायिक जांच पर अपना पक्ष रखने को कहा।
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कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से दायर जनहित याचिका में हंदवाड़ा में कथित तौर से सेना के जवान पर एक लड़की के साथ छेड़छाड़ के बाद भड़की हिंसा और उस दौरान मारे गए 5 स्थानीय निवासियों के मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग की है।
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जस्टिस अली मोहम्मद माग्रे और जस्टिस ताशी राबस्तान की की खंडपीठ के सामने बार अध्यक्ष मियां क्यूम ने डीविजन बैंच के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि हंदवाड़ा कहा कि मामले को दबाया जा रहा है। जिला मैजिस्ट्रेट ने अधिकार न होने के बावजूद अतिरिक्त जिला उपायुक्त को मैजिस्ट्रेट जांच के लिए कहा है। इस मामले में स्वयं एक पक्ष होने के बावजूद संबधित थाना प्रभारी ने भी जांच शुरू कर दी है।
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याचिका में आरोप लगाया गया कि पीड़ित छात्रा से जबरन बयान दिलाया गया और सेना को पहले ही क्लीन चिट दे दी गई। लिहाजा हाईकोर्ट के वर्तमान जज से मामले की न्यायिक जांच करवाई जाए। आईजीपी कश्मीर के नेतृत्व में विशेष जांच दल बनाया जाए जो मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच करे। खंडपीठ ने दलीलें सुनने के बाद राज्य सरकार को न्यायिक जांच पर अपना पक्ष रखने को कहा।
लड़की को अवैध हिरासत में रखने का आरोप
युवती मजिस्ट्रेट के सामने दे चुकी है बयान
- फोटो : Amar Ujala
हंदवाड़ा की छात्रा को पुलिस द्वारा अवैध रूप से हिरासत में रखने का लोगों ने विरोध किया। श्रीनगर प्रेस कालोनी में आयोजित प्रदर्शन के दौरान लोगों ने मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से अपील की कि मामले में गंभीरता से कार्रवाई की जाए। साथ ही लड़की और उसके परिवार से पुलिस द्वारा किए जा रहे दुर्व्यवहार को रोका जाए।
प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बोर्ड पकड़े थे, जिसमें नारे लिखे हुए थे। प्रदर्शनकारियों में शामिल एक युवती का कहना था कि छात्रा को पुलिस ने अवैध हिरासत में रखा है। उससे तत्काल रिहा किया जाना चाहिए। साथ ही मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इस दौरान बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थीं।
अवैध हिरासत मामले को याचिका में जोड़ें
हाईकोर्ट के जस्टिस मुजफ्फर हुसैन अतर ने लड़की की मां की ओर से दायर अवैध हिरासत मामले की याचिका को भी खंडपीठ के समक्ष पेश जनहित याचिका में जोड़ा जाए। पुलिस ने पिछले सप्ताह हंदवाड़ा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज छात्रा के बयान सहित अपनी स्टेटस रिपोर्ट भी अदालत में सौंपी।
लड़की ने किसी भी सेना के जवान द्वारा की गई छेड़छाड़ से इनकार किया है। गौरतलब है कि लड़की की मां द्वारा दायर याचिका में उसकी बेटी और पति को कथित अवैध हिरासत से रिहा करने की मांग भी की थी। अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख तक एक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए भी पुलिस को निर्देश दिया है।
प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बोर्ड पकड़े थे, जिसमें नारे लिखे हुए थे। प्रदर्शनकारियों में शामिल एक युवती का कहना था कि छात्रा को पुलिस ने अवैध हिरासत में रखा है। उससे तत्काल रिहा किया जाना चाहिए। साथ ही मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इस दौरान बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थीं।
अवैध हिरासत मामले को याचिका में जोड़ें
हाईकोर्ट के जस्टिस मुजफ्फर हुसैन अतर ने लड़की की मां की ओर से दायर अवैध हिरासत मामले की याचिका को भी खंडपीठ के समक्ष पेश जनहित याचिका में जोड़ा जाए। पुलिस ने पिछले सप्ताह हंदवाड़ा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज छात्रा के बयान सहित अपनी स्टेटस रिपोर्ट भी अदालत में सौंपी।
लड़की ने किसी भी सेना के जवान द्वारा की गई छेड़छाड़ से इनकार किया है। गौरतलब है कि लड़की की मां द्वारा दायर याचिका में उसकी बेटी और पति को कथित अवैध हिरासत से रिहा करने की मांग भी की थी। अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख तक एक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए भी पुलिस को निर्देश दिया है।