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Jammu News: शुक्र है भोर में हुआ हादसा.... बारिश में गिरा डोगरा हॉल स्कूल की छत का हिस्सा
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डोगरा हॉल स्कूल की हालत के बारे में अमर उजाला के बीती आठ अगस्त के अंक में प्रकाशित खबर।
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। आखिर वही हुआ, जिसका डर था...। मूसलाधार बारिश के बीच बुधवार की भोर में सुबह करीब पांच बजे सरकारी बालिका हाईस्कूल डोगरा हॉल की छत का बाहरी हिस्सा गिर गया। बारिश के पानी के रिसाव से चार कमरों में दरारें आई हैं। घटना के बाद स्कूल डर के साए में खुला लेकिन हद रही कि घटना के बावजूद बच्चों को जर्जर कमरों में बिठाकर ही पढ़ाई कराई गई।
अमर उजाला ने कैसी है पाठशाला अभियान के दौरान इस स्कूल की जर्जर हालत का भी मुद्दा उठाया था। आठ अगस्त 2025 के अंक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया था कि स्कूल की इमारत जर्जर हालत में है। खिड़कियों के शीशे टूटे हैं। दीवारें खस्ताहाल हैं। उनका पेंट तक झड़ चुका है। इतना ही नहीं, स्कूल के बाहर बाउंड्रीवॉल तक नहीं जिससे कभी भी कोई विद्यार्थी फिसलकर कच्चे में गिर सकता है और चोटिल हो सकता है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग के अधिकारी स्कूल का दौरा करने की जगह केवल बयान देकर नींद में रहे।
इस अनदेखी का ही नतीजा था जो बुधवार को स्कूल की छत की दीवार बारिश का वार नहीं झेल सकी। सुबह जब शिक्षकों ने स्कूल की टूटी दीवार देखी तो वे सकते में आ गए। उन्होंने तुरंत सभी कक्षों का जायजा लिया। गनीमत रही कि जिस वक्त छत की दीवार ढही तब स्कूल खुला नहीं था और कोई बच्चा या स्टाफ उस दीवार के आसपास मौजूद नहीं था।
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स्कूल के शिक्षकों ने घटना के संबंध में सीईओ यानी मुख्य शिक्षा अधिकारी अजीत शर्मा को भी फोन करके जानकारी दी। दोपहर दो बजे के बाद शिक्षा विभाग के साथ ही एक इंजीनियरिंग टीम मौके पर पहुंची। उसने हालात का जायजा लिया। अब यह टीम अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपेगी।
स्कूल में पढ़ रहे 106 बच्चे
70 के दशक से चल रहे इस स्कूल में वर्तमान में 106 बच्चे पढ़ रहे हैं। स्कूल की छत का हिस्सा गिरने के बावजूद जो बच्चे स्कूल पहुंचे उन्हें जर्जर कमरों में ही बिठाकर पढ़ाई कराई गई। किसी के पास इस सवाल का जवाब नहीं था कि अगर इन कक्षों में कोई हादसा हो गया तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।
छत पूरी नहीं गिरी, उसका एक हिस्सा ही गिरा है। हमारी टीम ने मौके का जायजा लिया है। बच्चों को अलग कहीं शिफ्ट करके स्कूल की मरम्मत कराई जाएगी। टूटे हिस्से का निर्माण कराया जाएगा। डीसी के आदेशानुसार असुरक्षित स्कूलों को चिन्हित किया जा रहा है।
-अजीत शर्मा, मुख्य शिक्षा अधिकारी, जम्मू
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जम्मू। आखिर वही हुआ, जिसका डर था...। मूसलाधार बारिश के बीच बुधवार की भोर में सुबह करीब पांच बजे सरकारी बालिका हाईस्कूल डोगरा हॉल की छत का बाहरी हिस्सा गिर गया। बारिश के पानी के रिसाव से चार कमरों में दरारें आई हैं। घटना के बाद स्कूल डर के साए में खुला लेकिन हद रही कि घटना के बावजूद बच्चों को जर्जर कमरों में बिठाकर ही पढ़ाई कराई गई।
अमर उजाला ने कैसी है पाठशाला अभियान के दौरान इस स्कूल की जर्जर हालत का भी मुद्दा उठाया था। आठ अगस्त 2025 के अंक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया था कि स्कूल की इमारत जर्जर हालत में है। खिड़कियों के शीशे टूटे हैं। दीवारें खस्ताहाल हैं। उनका पेंट तक झड़ चुका है। इतना ही नहीं, स्कूल के बाहर बाउंड्रीवॉल तक नहीं जिससे कभी भी कोई विद्यार्थी फिसलकर कच्चे में गिर सकता है और चोटिल हो सकता है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग के अधिकारी स्कूल का दौरा करने की जगह केवल बयान देकर नींद में रहे।
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इस अनदेखी का ही नतीजा था जो बुधवार को स्कूल की छत की दीवार बारिश का वार नहीं झेल सकी। सुबह जब शिक्षकों ने स्कूल की टूटी दीवार देखी तो वे सकते में आ गए। उन्होंने तुरंत सभी कक्षों का जायजा लिया। गनीमत रही कि जिस वक्त छत की दीवार ढही तब स्कूल खुला नहीं था और कोई बच्चा या स्टाफ उस दीवार के आसपास मौजूद नहीं था।
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स्कूल के शिक्षकों ने घटना के संबंध में सीईओ यानी मुख्य शिक्षा अधिकारी अजीत शर्मा को भी फोन करके जानकारी दी। दोपहर दो बजे के बाद शिक्षा विभाग के साथ ही एक इंजीनियरिंग टीम मौके पर पहुंची। उसने हालात का जायजा लिया। अब यह टीम अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपेगी।
स्कूल में पढ़ रहे 106 बच्चे
70 के दशक से चल रहे इस स्कूल में वर्तमान में 106 बच्चे पढ़ रहे हैं। स्कूल की छत का हिस्सा गिरने के बावजूद जो बच्चे स्कूल पहुंचे उन्हें जर्जर कमरों में ही बिठाकर पढ़ाई कराई गई। किसी के पास इस सवाल का जवाब नहीं था कि अगर इन कक्षों में कोई हादसा हो गया तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।
छत पूरी नहीं गिरी, उसका एक हिस्सा ही गिरा है। हमारी टीम ने मौके का जायजा लिया है। बच्चों को अलग कहीं शिफ्ट करके स्कूल की मरम्मत कराई जाएगी। टूटे हिस्से का निर्माण कराया जाएगा। डीसी के आदेशानुसार असुरक्षित स्कूलों को चिन्हित किया जा रहा है।
-अजीत शर्मा, मुख्य शिक्षा अधिकारी, जम्मू