J&K: इस ईद अपने घर का अंधेरा मिटाने आ रहा था औरंगजेब, याद करके पिता के आंखों में आए आंसू
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अपने बेटे से चंद घंट पहले फोन पर बात करने वाले मोहमद हनीफ का कहना था कि आज सबसे पहले उसने मुझे सुबह साढ़े चार बजे सहरी के समय फोन किया था। उसके बाद जब वह यूनिट से निकल रहा था करीब साढे़ आठ बजे फोन किया था कि निकल रहा हूं 12 बजे तक पुंछ पहुंच जाऊंगा।
उसने यह भी कहा था कि ईद के बाद हमारे घर में कभी अंधेरा नहीं होगा क्योंकि मैं अपने साथ इन्वर्टर लेकर आ रहा हूं। इतना कहते मोहमद हनीफ के आंसू निकल आए। कुछ देर खामोश रहने के बाद उसके पिता ने कहा कि ओरंगजेब का यहां इंतजार कर रहे थे कि शाम को एक साथ रोजा खोलने के बाद कल मिल कर ईद मनाएंगे।
मोहम्मद हनीफ के दिल में इस बात का भी गुस्सा है कि देश के लिए जान की बाजी लगाने वाले आतंकियों का सफाया करने वालों की सुरक्षा की कोई उचित व्यवस्था नहीं है। उनका कहना है कि अगर 11 बजे ओरंगजेब को अगवा किया गया तो हमारे हिन्दुस्तान के पास कितनी फैज है शाम सात बजे गए हैं और मेरे बेटे का पता भी नहीं चल पाया है।
जिस इलाके से उसे अगवा किया गया है उस इलाके में सभी आतंकियों को अब तक मार दिया जाना चाहिए था। इस बीच वह पाकिस्तान पर भी अपना गुस्सा निकालते हुए भंयकर गालियां देते हुए कहा कि पाकिस्तान को खत्म कर देना चाहिए।
बस एक बार मेरे बेटे को ईद मनाने के लिए भेज दो...
बूढ़ी पथराई आंखों में बेटे की सही सलामती की दुआएं भी काम न आईं। दिनभर बेटे के लापता होने की खबर के बाद जैसे ही मौत की खबर आई तो सैनिक औरंगजेब के परिवार पर कहर टूट गया। जिस परिवार में बेटे के साथ ईद मनाने का इंतजार हो रहा था।
उस घर में उसकी मौत की खबर पहुंची। बस एक बार मेरे बेटे को छोड़ दो। उसे ईद मनाने के लिए घर भेज दो। फिर चाहे वापस ले जाना। यह बोल ओरंगजेब की मां के हैं। जो बार बार आतंकियों अपील करती रही कि उसे छोड़ दो।
जिले की मेंढर तहसील के गांव सलानी निवासी पूर्व सैनिक मोहम्मद हनीफ के घर दोपहर बाद से गम का माहौल बना हुआ। जब से गांव में इस बात की सूचना पहुंची कि उनके बेटे ओरंगजेब को कश्मीर के शोपियां से घर लोटते समय बीच रास्ते से आतंकियों ने अगवा कर लिया।
इस खबर के पहुंचने के साथ ही जहां उनके घर पर बड़ी संख्या में रिश्तेदार और आस पड़ोस के लोग जमा हो कर पीडि़त परिवार के गम में शरीक हो रहे थे। वहीं सब लोग मिल कर खुदा से इस परिवार के रोजाें का फल देने और उनके बेटे के सही सलामत घर लोटने की दुआ भी कर रहे थे।
मोहम्मद हनीफ और उसकी पत्नी राज बी कभी खुदा से तो कभी आतंकियों से अपील करते रहे कि उसके कलेजे के टुकड़े को ईद मनाने के लिए छोड़ दें। मां का तो यहां तक कहना था कि अगर उसने किसी के साथ ज्यादती कि है और किसी को उस पर गुस्सा है तो वह उसे साथ लेकर घर आ जाएं। ईद मनाने के बाद उसे फिर अपने साथ ले जाएं। इतना कहने के साथ मां बार बार बेहोश हो जा रही थी।