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आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे आतंकी, आई-कॉम के जरिए पाकिस्तान में बैठे आकाओं से करते हैं बातचीत

Thu, 06 Feb 2020 01:37 PM IST
प्रशांत कुमार अमृतपाल सिंह बाली, जम्मू-कश्मीर
अमृतपाल सिंह बाली, जम्मू-कश्मीर Published by: प्रशांत कुमार Updated Thu, 06 Feb 2020 01:37 PM IST
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Terrorists using modern technology interact with bosses in Pakistan through I COM
डीजीपी दिलबाग सिंह - फोटो : बासित जरगर

जम्मू कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठन जैश कश्मीर में आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहा है। इस बात का खुलासा डीजीपी दिलबाग सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि नगरोटा मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों से बरामद हथियारों में जहां आधुनिक एम 4 राइफल मिली तो वहीं सरहद पार अपने आकाओं से बातचीत करने के लिए आधुनिक तकनीक वाले कम्यूनिकेशन सेट भी पाए गए।

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डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा कि जैश के आतंकियों का ग्रुप जब-जब पाकिस्तान से घुसपैठ कर आया है न सिर्फ उनके हथियार आला दर्जे के होते हैं बल्कि कम्यूनिकेशन की तकनीक भी रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में नगरोटा मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों से एम4 राइफल बरामद हुई है। जो यूएस आर्मी इस्तेमाल करती है।
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अक्तूबर 2018 में भी ऐसी राइफल से कश्मीर में कई स्नाईपिंग की घटनाओं को अंजाम दिया गया। कहा कि एक बार फिर से एम4 राइफल के साथ-साथ थर्मल इमेजर आदि जैसे आधुनिक हथियारों का जैश के आतंकियों से बरामद होना साबित करता है कि यह ग्रुप पूरी तैयारी के साथ आया था।
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ट्रक ड्राइवर से पूछताछ और जांच के दौरान हुआ खुलासा

डीजीपी ने बताया कि आतंकी दो तरह की कम्यूनिकेशन लेकर साथ आए थे। आई-कॉम और थौराया के सेट। ऐसी ही कम्यूनिकेशन तकनीक के चलते इन आतंकियों का बराबर राबता उनके पाकिस्तान में बैठे जैश और आईएसआई के हैंडलर के साथ रहता है।

आई-कॉम सेट बातचीत के लिए एक एप की मदद से बिना सिम कार्ड या सेटेलाइट सिग्नल के बिना काम करता है। इसके जरिए लोकल जीएसएम नेटवर्क के जरिए किसी भी जगह और किसी भी फोन से सम्पर्क साधा जा सकता है।

डीजीपी ने यह भी बताया कि आतंकी वीपीएन (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) का दुरुपयोग कर रहे हैं। हाल ही में जम्मू के नगरोटा में हुई मुठभेड़ में ट्रक चालक ने पहले मुठभेड़ की तस्वीर क्लिक की और इसे सबूत के तौर पर पाक को भेजा कि उन्हें रोक दिया गया है। इतना ही नहीं उससे पहले भी वो इंटरनेट का इस्तेमाल कर पाकिस्तान बात कर रहा था। इस बात का खुलासा ट्रक ड्राइवर से पूछताछ और जांच के दौरान हुआ है।

गौरतलब है कि हाल ही में दक्षिणी कश्मीर में मारे गए जैश कमांडर को लेकर डीजीपी ने कहा कि कारी यासिर के मारे जाने के बाद अभी कोई बयान सामने नहीं आया है कि आतंकियों द्वारा जैश की कमान किस को सौंपी है। यासिर सिर्फ दक्षिणी कश्मीर का ही नहीं बल्कि पूरी कश्मीर घाटी का ऑपरेशनल कमांडर था। मुमकिन है जो यह नया ग्रुप आ रहा था उसके पास ऐसे हथियार थे जो किसी बड़े कमांडर के पास होते हैं, लेकिन रास्ते में ही उन्हें मार गिराया गया है।

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