फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   terrorists rehabilitation policy to be renewed soon

अब आसान नहीं होगी, आतंकियों की वापसी

Thu, 23 Apr 2015 10:09 AM IST
Updated Thu, 23 Apr 2015 10:09 AM IST
विज्ञापन
terrorists rehabilitation policy to be renewed soon

आतंकियों की पुनर्वास नीति में बदलाव लगभग तय है। केंद्रीय गृह मंत्रालय इस नीति की समीक्षा कर रहा है। यूपीए शासनकाल में उमर अब्दुल्ला की सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की सहमति से 2010 में यह नीति लागू की थी जो अब तक अर्थहीन साबित हुई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रियासत सरकार से नीति पर मंतव्य मांगा है।

विज्ञापन


उधर पीओके में पाकिस्तान ने सख्ती बढ़ा दी है जिससे पूर्व आतंकियों के लिए चोरी-छिपे नेपाल के रास्ते कश्मीर लौटना ज्यादा मुश्किल हो गया है। नीति के तहत अधिकृत रूट से पांच साल में अबतक एक भी आतंकी की वापसी नहीं हो सकी है। अधिकृत रूट से वापसी पाकिस्तान की सहमति से ही संभव है और पाकिस्तान इसकी इजाजत नहीं देता।
विज्ञापन


गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद पांच साल पहले बनाई गई नीति के तहत पुंछ-रावलाकोट, उड़ी-मुजफ्फराबाद, बाघा और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, दिल्ली को आतंकियों की घर वापसी के लिए अधिकृत रूट बनाया गया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

1100 ने किया वापसी के लिए आवेदन

terrorists rehabilitation policy to be renewed soon

यह नीति वैसे पूर्व आतंकियों के पुनर्वास के लिए है जो 1990 के दशक में हथियारों का प्रशिक्षण लेने पीओके चले गए थे और अब कश्मीर वापस लौटना चाहते हैं। पीओके में ऐसे आतंकियों की संख्या चार हजार से अधिक है। इनमें से 1100 आतंकियों के परिवार वालों ने कश्मीर वापसी के लिए जम्मू कश्मीर सरकार के पास आवेदन कर रखा है।

नीति के तहत वापसी के बाद आतंकियों को पुनर्वास पैकेज का प्रावधान है। राहत और रियायतों के लिए आतंकियों की वापसी अधिकृत रूट से होना जरूरी है। चूंकि अधिकृत रूट से एक भी आतंकी का वापसी नहीं हुई है इसलिए नेपाल रास्ते से वापस लौटने वालों को कोई सुविधा नहीं दी गई है।

भाजपा शुरू से इस नीति के खिलाफ रही है। आतंकियों में से अधिकांश ने पीओके में निकाह कर लिया है नतीजतन वे अपने परिवार के साथ वापसी चाहते हैं। नेपाल का रास्ते अबतक 323 आतंकी अपने परिवार के साथ कश्मीर लौटे हैं। नेपाल के रास्ते लौटने वाले आतंकियों के परिवार वाले पहले रियासत सरकार को सूचना देते हैं।

पीओके से शुरू हुई फंडिंग

terrorists rehabilitation policy to be renewed soon

इस सूचना के बाद रियासत सरकार उनकी सुरक्षा की व्यवस्था करती है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के जम्मू कश्मीर सेल के माध्यम से उन्हें कश्मीर लाया जाता है। आतंकी लियाकत अली की पीओके से वापसी के क्रम में दिल्ली में हुई गिरफ्तारी में दिल्ली पुलिस पर लगे आरोपों के बाद यह व्यवस्था विकसित की गई थी।

गृह विभाग के सूत्रों के मुताबिक अब आतंकियों के परिवार वाले वापसी के लिए रियासत सरकार से संपर्क नहीं कर रहे हैं। इस साल चार महीने में नेपाल रूट से सिर्फ एक आतंकी की वापसी हुई है जबकि पिछले साल 95 आतंकियों की परिवार के साथ वापसी हुई थी।

सूत्र बताते हैं कि पुनर्वास पैकेज नहीं मिलने के कारण आतंकियों की वापसी कम हो रही है। इसके अलावा अब पीओके में उन्हें फंडिंग शुरू हो गई है। 2010 से 2014 तक पाकिस्तान की एजेंसियों द्वारा फंडिंग नहीं होने के कारण आतंकी कश्मीर वापसी के लिए प्रयासरत थे। अब वापसी के लिए उनकी दिलचस्पी घटी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed