J&K: पंचायत चुनाव पर मंडरा रहा आतंकी साया, बड़े हमले की साजिश
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू कश्मीर में आने वाले दिनों में होने वाले पंचायत चुनाव पर आतंकी साया मंडराने लगा है। जम्मू कश्मीर सरकार ने मार्च में पंचायत चुनाव कराने का एलान किया है। इस बाबत प्रशासनिक तैयारियां तेज हैं, लेकिन आतंकी संगठन पंचायत चुनाव टालने के लिए बड़े हमले की साजिश बुन रहे हैं।
हुर्रियत ने भी हर हाल में पंचायत चुनाव रोकने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। उधर, पाकिस्तान की ओर से लगातार सीजफायर के उल्लंघन से बड़े पैमाने पर आतंकी घुसपैठ के षड्यंत्र का भी खुलासा हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद पर सख्ती से आतंकी गतिविधियों में इजाफा हुआ है।
घुसपैठ की कोशिशें तेज हो गई हैं। आम तौर पर बर्फबारी के दौरान सीजफायर के उल्लंघन और घुसपैठ की कोशिशों में कमी आती रही है, लेकिन पाकिस्तान की ओर से इस बार बदली हुई रणनीति पर अमल हो रहा है।
हिजबुल के 300 से अधिक आतंकी कश्मीर घाटी में सक्रिय
पिछले साल एलओसी पर 228 बार और बार्डर पर 221 बार सीजफायर का उल्लंघन हुआ था, लेकिन जनवरी 2016 में युद्ध विराम को धता बताकर पाकिस्तान की ओर से गोलाबारी घटनाएं नहीं दिखीं, जबकि इस साल जनवरी में पाकिस्तान ने 10 बार सीजफायर तोड़ा और फरवरी में छह बार गोले दागे।
हर बार सीजफायर के उल्लंघन की आड़ में घुसपैठ की कोशिशें हुईं जिसे सुरक्षा बलों ने नाकाम किया। लश्कर और हिजबुल मुजाहिदीन के 300 से अधिक आतंकी कश्मीर घाटी में सक्रिय हैं।
सेना और सुरक्षा बल पंचायत चुनाव से पहले इन आतंकियों को और उनके ठिकानों को ध्वस्त करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसी अभियान के तहत कश्मीर के ग्रामीण इलाकों में डोर टू डोर सर्च आपरेशन चल रहा है।
घाटी में फिर से हिंसा के हालात पैदा करने की साजिश
पिछले तीन दिनों में कुलगाम और बांदीपोरा में मुठभेड़ में आतंकियों की मौत के बाद हुर्रियत को नया मुद्दा मिल गया है। आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद पैदा हुए हिंसा के माहौल जैसी स्थिति पैदा करने की कोशिशें तेज हुईं हैं। इस क्रम में बुधवार को अलगाववादियों के कुलगाम मार्च पर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं।
आतंकी संगठनों ने पहले भी पंचों और सरपंचों की हत्याओं का सिलसिला चलाया था जिसके बाद भय के कारण अधिकांश पंचों और सरपंचों के सामूहिक इस्तीफे सामने आए थे। इस बार आतंक का माहौल बनाने की साजिश फिर से तेज है। दुनिया की नजर में कश्मीर को विवादग्रस्त क्षेत्र साबित करने की साजिश के तहत पंचायत चुनाव आतंकियों और अलगाववादियों के निशाने पर हैं।