J&K: सुरंगें खोदने में आतंकियों को मिल रही स्थानीय मदद
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सीमा पार से घुसपैठ करने वाले आतंकियों को सीमा पर स्थानीय मदद मिल रही है। इसी से सीमा पर सुरंगें खोदने का काम संभव हो पा रहा है। आतंकियों के लिए काम करने वाले ओवरग्राउंड वर्कर्स उन्हें ऐसी लोकेशन बता रहे हैं, जहां सुरंग बनाना और सुरंग बनाकर वहां से घुसपैठ करना बहुत आसान है।
आतंकियों को पाकिस्तानी रेंजरों का भी इस काम में पूरा सहयोग मिल रहा है। बीएसएफ के उच्च अधिकारी भी इससे इंकार नहीं कर रहे। खुफिया एजेंसियां आतंकियों को मदद करने वाले ओवरग्राउंड वर्कर्स के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए रणनीति बना रही हैं।
सूत्रों का कहना है कि सीमा पर सक्रिय ओवरग्राउंड वर्कर्स आतंकियों को बता रहे हैं कि किस लोकेशन में सुरंग खोदना संभव है। पिछले एक साल में तीन सुरंगों के खोदने के मामले सामने आ चुके हैं।
आतंकी सुरंग खोदने के लिए विदेशी तकनीक का इस्तेमाल
आतंकी वर्करों को अपनी तरफ से संभव लोकेशन की जानकारी देते हैं, इसके बाद वर्कर उसी लोकेशन से भारतीय सीमा की संभव लोकेशन के बारे जानकारी देते हैं। इसके आधार पर खोदाई का काम शुरू कर दिया जाता है।
आतंकी सुरंग खोदने के लिए विदेशी तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे जमीन में काम करते वक्त शोर बहुत कम होता है। सूत्रों का यह भी कहना है कि खोदाई करने वाले आतंकी विशेष रूप से खोदाई की ट्रेनिंग करने के बाद ही ऐसा कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि नवंबर 2016 में रामगढ़ सेक्टर में आतंकियों ने रैट होल सुरंग से घुसपैठ की थी। हालांकि घुसपैठ करने वाले तीनों आतंकी मार गिराए गए थे।