राइजिंग कश्मीर अखबार के संपादक शुजात बुखारी और पीएसओ की आतंकियों ने की हत्या
वरिष्ठ पत्रकार व अंग्रेजी अखबार राइजिंग कश्मीर के मुख्य संपादक शुजात बुखारी तथा उनके पीएसओ की आतंकियों ने गुरुवार शाम हत्या कर दी गई। प्रेस इन्क्लेव के पास उनकी गाड़ी को घेरकर आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग की।
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती व पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हमले की निंदा करते हुए गहरा दुख व्यक्त किया है। पुलिस ने हमले की जांच शुरू कर दी है। आसपास के इलाकों की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया गया है।
शाम सात बजे प्रेस इन्क्लेव से जैसे ही वह अपनी गाड़ी से जाने लगे तो आतंकियों ने गाड़ी को घेरकर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। इसके बाद वे मौके से फरार हो गए। बताते हैं कि चार आतंकियों ने बिल्कुल करीब से गोलियां बरसाईं। सूत्रों ने यह भी बताया कि आतंकी अपने साथ पीएसओ की हथियार भी ले गए हैं।
घटना के बाद शुजात तथा उनके पीएसओ को एसएमएचएस अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने मृत लाया घोषित कर दिया। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया कि यह कायराना हरकत है। यह कश्मीर की स्वस्थ आवाज को दबाने का बी प्रयास है। वह निर्भिक पत्रकार थे। उनके निधन से गहरा दुख है।
मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने घटना पर शोक जताते हुए ट्वीट किया कि वह इस प्रकार की हिंसा की निंदा करती हैं और परिवार के प्रति गहरी संवेदना जताते हैं। ईद की पूर्व संध्या पर आतंक का कुरुप चेहरा सामने आया है।
पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी ट्वीट कर कहा कि वह इस घटना से हतप्रभ हैं। दुख की इस घड़ी में परिवार वालों को शक्ति प्रदान करें। लश्कर के प्रवक्ता डा. अब्दुल्ला गजनवी ने इस घटना को अफसोसजनक खबर बताते हुए कहा है कि शुजात की हत्या आजादी की आवाज को दबाने की साजिश है।
चार घंटे पहले यूएन रिपोर्ट पर रीट्वीट किया था
चार घंटे पहले यूएन रिपोर्ट पर रीट्वीट किया था
घटना से चार घंटे पहले शुजात बुखारी ने रीट्वीट किया था कि भारत ने कश्मीर पर यूएन रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि पुलिस हमले के सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। इस ट्वीट को भी जांच के बिंदु के रूप में शामिल किया गया है।
पत्रकार शुजात बुखारी पर इसके पहले साल 2000 में भी आतंकी हमला हो चुका था। हालांकि वह उस दौरान बाल बाल बच गए थे। उस हमले के बाद ही उन्हें पुलिस ने सुरक्षा मुहैया कराई थी। शुजात कश्मीर में शांति की बहाल कराने के लिए लगातार सक्रिय थे।
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राहुल गांधी ने कहा कि राइजिंग कश्मीर के संपादक शुजात बुखारी की हत्या के बारे में सुनकर बहुत ही दुखी हूं। वह बहादुर थे जिन्होंने बिना किसी भय के जम्मू-कश्मीर में न्याय और शांति के लिए लड़ाई लड़ी। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं। लोग उन्हें याद रखेंगे।