{"_id":"5eb3018a8ebc3e904032e1cb","slug":"terrorist-problem-jammu-news-jmu2094119136","type":"story","status":"publish","title_hn":"नायकू ने कश्मीर से पंजाब-चंडीगढ़ तक फैला रखा था नेटवर्क, करवाता था हवाला फंडिंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नायकू ने कश्मीर से पंजाब-चंडीगढ़ तक फैला रखा था नेटवर्क, करवाता था हवाला फंडिंग
Thu, 07 May 2020 03:38 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
Updated Thu, 07 May 2020 03:38 AM IST
विज्ञापन
Riyaz Naikoo
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आतंक का पर्याय बने रियाज नायकू ने कश्मीर घाटी ही नहीं प्रदेश के बाहर पंजाब और चंडीगढ़ में भी नेटवर्क फैला रखा था। वह संगठन की आर्थिक मदद के लिए इन राज्यों से हवाला के जरिए फंडिंग करवाता था।
विज्ञापन
पिछले महीने अमृतसर में 29 लाख रुपये के साथ पुलवामा का एक युवक पकड़ा गया था, जिसने पूछताछ में रियाज नायकू के लिए पैसे की वसूली की बात कबूली थी। नायकू के मारे जाने से घाटी के साथ-साथ पंजाब व चंडीगढ़ के लोगों को राहत मिली है।
विज्ञापन
सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि नायकू ने अपने नेटवर्क में पढ़े-लिखे लोग रखे थे। वह बीटेक और व्यावसायिक कोर्स करने वाले युवकों को बहला-फुसलाकर आतंकी घटनाओं में शामिल करता था।
विज्ञापन
उसका तर्क था कि पढ़ने वाले युवक स्मार्ट होते हैं और फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने और वेशभूषा के कारण जल्दी संदेह के दायरे में नहीं आते। सूत्रों के अनुसार नायकू ने चंडीगढ़, मोहाली और लुधियाना में पढ़ने वाले घाटी के कुछ युवाओं को अपने नेटवर्क से जोड़ रखा था।
वह घाटी से निकलकर अपने नेटवर्क के पास आता-जाता था। 25 अप्रैल को लॉकडाउन के बीच अमृतसर में पुलिस ने पुलवामा के हिलाल अहमद वागे को अमृतसर-जालंधर मार्ग पर मेट्रो मार्ट के पास से गिरफ्तार किया था। उसके पास से 29 लाख रुपये मिले थे। पूछताछ में उसने बताया था कि वह हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़ा हुआ है। उसे रियाज नायकू ने पैसे लेने के लिए ट्रक से भेजा था।
बदलता रहता था ठिकाने
दक्षिणी कश्मीर के साथ ही बाहरी राज्यों में वह कहीं भी एक स्थान के बजाय ठिकाने बदल-बदल कर ठहरता था। वह आतंकियाें को मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर भी सतर्क करता रहता। ऑपरेशन ऑलआउट के तहत वर्ष 2017 में जब एक के बाद एक कई आतंकी मारे जाने लगे तो उसने आतंकियों को मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करने की हिदायत दी थी। उसने फोन के जरिये लोकेशन ट्रेस होने की वजह बताई थी।