जम्मू-कश्मीर: टेरर फंडिंग नेटवर्क में शामिल सात पर कोर्ट में आरोप तय, पढ़ें कैसे हुआ था खुलासा और रशीद कोका का रोल
जांच के दौरान सामने आया कि यह आरोपी एक ऐसी नेटवर्क के लिए काम कर रहे थे, जो एक तरफ अज्ञात स्रोत से पैसा एकत्रित कर आतंकियों तक पहुंचा रहे थे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के विशेष जज सुनित गुप्ता ने टेरर फंडिंग मामले में जम्मू से पकड़े गए दो आरोपियों समेत सात लोगों पर आरोप तय किए हैं। मौखिक और डिजिटल सुबूतों के बिनाह पर प्रथम दृष्टया इन आरोपियों की संलिप्तता पाए गई, जिस पर कोर्ट ने किफायत रशीद कोका, आजाद अहमद कोका, इश्फाक मजीद कोका, अल्ताफ अहमद डार, आबिद हुसैन बख्शी, मुबारक अहमद ठोकर और जुबैर फारूक कोका पर विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय कर दिए।
अभियोजन के अनुसार जेआईसी जम्मू पुलिस थाने को सूचना मिली कि किफायत रशीद कोका और एजाज अहमद कोका निवासी शोपियां अपने अन्य साथियों के साथ टेरर फंडिंग नेटवर्क के लिए काम कर रहे हैं। पुख्ता जानकारी जुटाने के बाद मामला दर्ज कर छानबीन तेज की गई। तफतीश में पुलिस ने नवाबाद सुंजवां और भठिंडी स्थित जम्मू-कश्मीर बैंक शाखाओं के खाते खंगालने पर लाखों रुपये इन खातों में जमा पाए गए। मोबाइल फोन नंबर और लेनदेन के रिकॉर्ड के तार से टेरर नेटवर्क की कड़ियां जुड़ती गईं। पुलिस ने फौरन किफायत रशीद कोका और आजाद अहमद कोका को हिरासत में लेकर पूछताछ तेज कर दी। कड़ी पूछताछ में आरोपियों ने टेरर फंडिंग नेटवर्क के राज उगल दिए।
किफायत रशीद कोका ने बताया कि पहले वह पुलिस में एसपीओ था। उसने पुलिस की नौकरी छोड़कर रेडीमेड गारमेंट दुकान खोली। इस दुकान में इश्फाक मजीद कोका और इरफान अहमद उसके पार्टनर थे। कुछ देर बाद दुकान का कारोबार ठप पड़ गया। इश्फाक मजीद कोका का सगा भाई बुरहान कोका अंसार गजवात हिंद का आतंकी था। बुरहान कोका को देख उन्होंने भी उसके साथ मिलने का फैसला कर लिया। अप्रैल 2020 में बुरहान कोका के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद वे इस टेरर नेटवर्क में सक्रियता से शामिल हो गए। इसी तरह से अन्य आरोपियों ने भी इस नेटवर्क की गतिविधियों को आगे बढ़ाया।