जम्मू-कश्मीर: पर्यटन सीजन में टारगेट किलिंग ने रोके सैलानियों के कदम, होटलों में रद्द होने लगी एडवांस बुकिंग
पर्यटन निदेशालय भी पर्यटकों को लुभाने के लिए आगामी दिनों में कई फेस्टिवल का आयोजन कर रहा है। लेकिन वर्तमान परिदृश्य में पर्यटन सीजन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। पर्यटन से जुड़े टूर एंड ट्रैवल और होटल व्यवसाय में भी मंदी दिखने लगी है।
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कश्मीर में नागरिकों को आतंकियों द्वारा निशाना बनाए जाने के बाद से पर्यटन सीजन पर खतरा मंडराने लगा है। कोविड की दो लहरों और अन्य परिस्थितियों के कारण पिछले दो साल से जम्मू-कश्मीर में पर्यटन को गति नहीं मिल पाई थी। कोविड अनलॉक के बाद गतिविधियां शुरू हुईं। जुलाई 2021 से पर्यटकों का प्रदेश में आवागमन शुरू हुआ।
गत जून तक कोविड पाबंदियों के कारण जम्मू-कश्मीर में खुलकर पर्यटक नहीं पहुंच पाए थे। लेकिन जुलाई से सितंबर तक पर्यटकों ने रुझान दिखाया। इस वर्ष प्रदेश में जुलाई में 1003087, अगस्त में 1099776 और सितंबर में 12 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे। लेकिन कश्मीर में हो रही सिलेक्टिव कीलिंग से पर्यटकों ने कदम रोक दिए हैं।
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ऑल जम्मू होटल एंड लगेज एसोसिएशन के प्रधान पवन गुप्ता ने कहा कि सड़क मार्ग से आने वाले पर्यटक जम्मू में रुककर कश्मीर जाते हैं। लेकिन मौजूदा हालात में कश्मीर के साथ जम्मू में भी पर्यटकों द्वारा होटल बुकिंग रद्द की जा रही है। कोविड के कारण दो साल से होटल व्यवसाय पहले ही बुरी तरह से प्रभावित हुआ। इस सीजन होटल व्यवसाय में गति मिलने की उम्मीद लग रही थी। कश्मीर में बने हालात को नियंत्रण करने के लिए सरकार को उचित कदम उठाने चाहिए। इसके साथ जम्मू में पर्यटकों को रोकने के लिए कृत्रिम झील, बागे बाहू स्थित म्यूजिकल फाउंटेन, मुबारमंडी जिर्णोंद्धार आदि लंबित पर्यटन परियोजनाओं को जल्द पूरा करना चाहिए।
कश्मीर के हालात का पड़ रहा सीधा असर
टूर एंड ट्रैवल एसोसिएशन के प्रधान आशुतोष गुप्ता ने कहा कि कश्मीर में मौजूदा हालात का टूर एंड ट्रैवल व्यवसाय पर सीधा असर पड़ा है। कश्मीर के लिए प्रतिदिन जम्मू से करीब 200 से 300 टैंपो ट्रेवल आदि रवाना होते हैं, इसके अलावा 40-45 दूसरे वाहन पर्यटकों को लेकर जा रहे थे। लेकिन सिलेक्टिव कीलिंग के बाद पर्यटकों ने आना बंद कर दिया है। कश्मीर के साथ जम्मू का टूर एंड ट्रैवल व्यवसाय प्रभावित हो रहा है।
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प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा असर
चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री जम्मू के प्रधान अरुण गुप्ता का कहना है कि कश्मीर में गैर स्थानीय लोगों की हत्याओं से बड़ी संख्या में बाहरी लोगों का पलायन हो रहा है। कश्मीर में ही करीब पांच लाख श्रमिक काम के सिलसिले में रह रहे हैं। श्रमिकों के पलायन से कश्मीर के साथ जम्मू में भी श्रम शक्ति का अभाव हो जाएगा। इससे निर्माण कार्यों की लागत बढ़ेगी। ऐसी घटनाओं को रोकने को उचित कदम उठाने चाहिए।