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Jammu Kashmir: परिसीमन को लेकर दायर याचिका पर 29 को होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
Thu, 17 Nov 2022 05:24 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू/नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू/नई दिल्ली
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Thu, 17 Nov 2022 05:24 PM IST
सार
केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण के लिए परिसीमन आयोग के गठन के सरकार के फैसले को सांविधानिक प्रावधानों का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी गई है।
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जम्मू-कश्मीर
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट जम्मू-कश्मीर परिसीमन को लेकर दायर याचिका पर अब 29 नवंबर को सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा कि वह इस मामले में कुछ और दस्तावेज दाखिल करना चाहती है। इस पर कोर्ट ने सरकार को अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने की इजाजत दे दी। याचिका में केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण के लिए परिसीमन आयोग के गठन के सरकार के फैसले को सांविधानिक प्रावधानों का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी गई है।
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जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एएस ओका की पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मामले में और दस्तावेज रिकॉर्ड पर रखने की बात कही। इस पर पीठ ने उन्हें एक हफ्ते के अंदर दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया और कश्मीर के दो निवासियों हाजी अब्दुल गनी खान और डॉ. मोहम्मद अयूब मट्टू की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई 29 नवंबर के लिए स्थगित कर दी।
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30 अगस्त 2022 को जम्मू-कश्मीर के चुनाव क्षेत्रों के प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने इन्कार कर दिया था। कोर्ट ने 2020 में जारी की गई अधिसूचना को चुनौती देने के लिए याचिकाकर्ता से कहा था कि आप दो साल से अब तक कहां सो रहे थे? हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन और निर्वाचन आयोग से छह हफ्ते में जवाब तलब किया था।
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अपने जवाब में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग ने कहा कि विधानसभा चुनाव के लिए विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन के लिए परिसीमन आयोग की रिपोर्ट को कहीं भी चुनौती नहीं दी जा सकती है। परिसीमन आयोग की 25 अप्रैल को सौंपी गई फाइनल रिपोर्ट के मुताबिक परिसीमन के जरिए जम्मू-कश्मीर विधानसभा के लिए 83 सीटों की जगह 90 हो जाएंगी। इन पर विधानसभा और पांच नई प्रस्तावित लोकसभा सीटों पर चुनाव होगा। याचिका दाखिल कर केंद्रशासित प्रदेश में परिसीमन करने के सरकार के फैसले को चुनौती दी गई है।
याचिका में कहा गया है कि यह परिसीमन जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन एक्ट 2019 की धारा 63 और संविधान के अनुच्छेद 81, 82,170, 330, 332 के खिलाफ है। इसके अलावा याचिका में जम्मू कश्मीर परिसीमन आयोग के गठन को भी असांविधानिक बताया गया है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 170 के तहत देश में अगला परिसीमन 2026 में होना ही है। ऐसे में अलग से जम्मू-कश्मीर में परिसीमन क्यों किया जा रहा है।