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इतने दिन हो गए, अब तक एचओडी पर कार्रवाई क्यों नहीं
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जम्मू। एसोसिएट प्रो. चंद्रशेखर की खुदकुशी मामले की गुत्थी दो हफ्ते बाद भी नहीं सुलझ पाई है। चंद्रशेखकर की पत्नी डॉ. नीता का भी कहना है कि मामला ठंडा किया जा रहा है। न्याय के लिए सिर्फ शिक्षक संघ संघर्ष कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया है कि जब वह साफ तौर पर एसआईटी को बता चुकी हैं कि पति के खिलाफ साजिश हुई। उनको मनोविज्ञान विभाग की एचओडी आरती बक्शी तंग करती थीं। बावजूद इसके उन पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई है।
पुलिस को स्पष्ट कर चुकी हैं कि विवि प्रशासन ने पति के खिलाफ कार्रवाई करने में नियमों का पालन नहीं किया। न तो पति का पक्ष सुना और बिना सुनवाई के ही उन्हें निलंबित कर दिया गया। बावजूद इसके अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। यहां तक कि जो स्टूडेंट्स उनके पति के पास से पढ़ चुके हैं, उनसे भी पुलिस ने पूछताछ नहीं की है। क्योंकि उनके पास कई छात्रों के फोन नंबर हैं, जिन्होंने बताया कि पुलिस ने उनसे मामले के संदर्भ में कोई पूछताछ नहीं की है।
छात्राओं को शिकायत के लिए किया मजबूर
चंद्रेशखर एचओडी बनने वाले थे। जब 15 साल से उनके खिलाफ कोई शिकायत नहीं आई तो ठीक उनके पदोन्नति के वक्त ही ऐसा क्यों किया गया। डॉ. नीता का दावा है कि चंद्रशेखर के खिलाफ शिकायत करने वाली छात्राओं की भी कोई गलती नहीं। उनके ऊपर शिकायत करने के लिए दबाव बनाया गया। उनको मजबूर किया गया कि वह ऐसा करें।
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रिपोर्ट का इंतजार, जरूरत पड़ने पर कहीं भी जाऊंगी
मुझे तो यह भी जानकारी नहीं है कि एसआईटी को जांच करने में कितना वक्त लगता है। एसआईटी क्या कर रही है इसके बारे में भी कोई जानकारी नहीं है। जिन लोगों से भी अब तक बात की है, उन्होंने यही कहा है कि एसआईटी की जांच पर विश्वास रखूं। रिपोर्ट का इंतजार है। अन्यथा उनके सामने बहुत से रास्ते हैं। पति को इंसाफ दिलाने के लिए जहां भी जाना पड़ेगा जाऊंगी।
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पुलिस को स्पष्ट कर चुकी हैं कि विवि प्रशासन ने पति के खिलाफ कार्रवाई करने में नियमों का पालन नहीं किया। न तो पति का पक्ष सुना और बिना सुनवाई के ही उन्हें निलंबित कर दिया गया। बावजूद इसके अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। यहां तक कि जो स्टूडेंट्स उनके पति के पास से पढ़ चुके हैं, उनसे भी पुलिस ने पूछताछ नहीं की है। क्योंकि उनके पास कई छात्रों के फोन नंबर हैं, जिन्होंने बताया कि पुलिस ने उनसे मामले के संदर्भ में कोई पूछताछ नहीं की है।
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छात्राओं को शिकायत के लिए किया मजबूर
चंद्रेशखर एचओडी बनने वाले थे। जब 15 साल से उनके खिलाफ कोई शिकायत नहीं आई तो ठीक उनके पदोन्नति के वक्त ही ऐसा क्यों किया गया। डॉ. नीता का दावा है कि चंद्रशेखर के खिलाफ शिकायत करने वाली छात्राओं की भी कोई गलती नहीं। उनके ऊपर शिकायत करने के लिए दबाव बनाया गया। उनको मजबूर किया गया कि वह ऐसा करें।
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रिपोर्ट का इंतजार, जरूरत पड़ने पर कहीं भी जाऊंगी
मुझे तो यह भी जानकारी नहीं है कि एसआईटी को जांच करने में कितना वक्त लगता है। एसआईटी क्या कर रही है इसके बारे में भी कोई जानकारी नहीं है। जिन लोगों से भी अब तक बात की है, उन्होंने यही कहा है कि एसआईटी की जांच पर विश्वास रखूं। रिपोर्ट का इंतजार है। अन्यथा उनके सामने बहुत से रास्ते हैं। पति को इंसाफ दिलाने के लिए जहां भी जाना पड़ेगा जाऊंगी।