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कारगिल गाथा: जख्मों की परवाह किए बिना दुश्मन पर भारी पड़े राम गिल

Sun, 10 Jul 2016 01:26 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Sun, 10 Jul 2016 01:26 PM IST
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story of kargil war hero ram gil
8 जाट रेजीमेंट के हवलदार राम गिल - फोटो : ADGPI-Indian Army
9 जुलाई 1999
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सत्रह हजार फुट की ऊंचाई पर बैठे दुश्मन तक पहुंचना बेहद मुश्किल था। पहले सीधी चढ़ाई और फिर दुश्मन की गोलाबारी का खतरा। इसके बावजूद 8 जाट रेजीमेंट के हवलदार राम गिल ने कमांडो टीम के नेतृत्व का जिम्मा लिया।

सीधी चढ़ाई होने की वजह से ऊपर तक पहुंचना लगभग नामुमकिन था, लेकिन राम गिल ने न सिर्फ चढ़ाई में पहल की, बल्कि दुश्मन के आर्टीलरी और मोर्टार फायर से घायल होने के बावजूद वह लक्ष्य को हासिल करने की जिद पर अड़े रहे।
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उनकी टांग बुरी तरह से घायल थी और खून लगातार रिस रहा था। अपने जख्मों से बेपरवाह राम गिल ने जब भी मौका मिला स्नाइपर और एलएमजी बर्स्ट से दुश्मन की पोस्ट पर हमले जारी रखे।
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नतीजा ये हुआ कि दुश्मन की पोस्ट पर तैनात पाकिस्तान का एक अधिकारी, दो जेसीओ और तीन अन्य रैंक के जवान ढेर हो गए। घायल राम गिल आखिरी सांस तक लक्ष्य हासिल करने के लिए टीम को प्रेरित करते शहीद हो गए। इस खास मिशन में हवलदार राम गिल की बहादुरी और निर्भीक नेतृत्व कौशल के लिए उन्हें वीर चक्र (मरणोपरांत) का सम्मान दिया गया।
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