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इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे: किसी से कम नहीं जम्मू कश्मीर की बेटियां

Wed, 11 Oct 2017 01:51 PM IST
एस खजूरिया, अमर उजाला/ कठुआ
एस खजूरिया, अमर उजाला/ कठुआ Updated Wed, 11 Oct 2017 01:51 PM IST
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story of jammu kashmir daughter on international child girl day

बेटियां भी किसी से कम नहीं। मन में कुछ कर दिखाने की चाह हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती। कोई भी मुकाम ऐसा नहीं जो हासिल नहीं किया जा सकता। बेटियों को कम आंकने वालों को उन बेटियों की ओर भी देखना चाहिए जिन्होंने समाज को आइना दिखाते हुए आज अच्छे मुकाम हासिल किए हैं।

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बेटियों को आगे बढऩे का हक है जिसमें यदि सहयोग किया जाए तो परिणाम अनुमान से भी बेहतर ही मिलेंगे। यह बातें अमर उजाला से विशेष बातचीत में जम्मू कश्मीर की बेटी तेजस्वी शर्मा ने कहीं। जम्मू संभाग के जिला कठुआ में हीरानगर कसबे की मूल निवासी तेजस्वी ने नटरंग से अपना कारवां शुरू किया और कुछ ही सालों के भीतर आज मुंबई में छोटे पर्दे पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं।
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नौ सालों की अथक मेहनत रंग लाई है। तेजस्वी जी के खाना खजाना कार्यक्रम, यूटीवी के हल्ला बोल के अलावा सोनी और लाइफ ओके के विभिन्न कार्यक्रमों में नजर आ रही हैं। इसके साथ ही तेजस्वी लाइफ स्टाइल मैगजीन के लिए माडलिंग और फ्लावरी ब्रांड की ब्रांड अबेस्डर भी बन चुकी हैं। लेकिन तेजस्वी के सपने की उड़ान अभी अधूरी है। अपने सिद्धांतों पर रहकर तेजस्वी दूसरों के लिए भी मिसाल कायम करना चाहती है। 

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नटरंग के घुमई ने देश और दुनिया में दिलाई पहचान

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बेहतरीन अदाकारी से लोगों को अपने नाट्यों के माध्यम से कभी खुशी तो कभी गम का एहसास करवाते-करवाते आज तेजस्वी जिले की शान बन गई है। तेजस्वी ने कठुआ के स्पोर्ट्स स्टेडियम में पहली बार घुमाई का मंचन से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। नारी व्यथा और नारी जीवन को अपनी अदाकारी से जीवंत कर तेजस्वी ने हजारों लोगों को अपना मुरीद बना लिया।

उसने अपनी प्रतिभा से युवाओं को प्रेरणा भी दी। तेजस्वी ने बताया कि हीरानगर के एक सामान्य परिवार से जुड़े होने के बावजूद सपनों को देखा और साकार भी किया। उसने बताया कि वर्ष 2008 में झीड़ी मेले के दौरान 'बावा जीत्तो नाटक से अभिनय की शुरुआत की। कारवां आगे बढ़ता गया और पद्मश्री सम्मानित बलवंत ठाकुर के नेतृत्व में देश और दुनिया के विभिन्न कोनों में डोगरी सभ्यता को सामने लाया।

उन्होंने बताया कि माडर्न पब्लिक स्कूल हीरानगर से शिक्षा प्राप्त करने के बाद परिजनों के सहयोग से आसमान की बुलंदियों को छूने की चाह साकार होती गई। उन्होंने बताया कि विदेशों में रूस, जर्मनी, पोलैंड और हंगरी में भी नटरंग के नाट्यों के मंचन को अच्छी सफलता मिली है। अब तक तीस राष्ट्रीय समारोहों में भाग ले चुकी तेजस्वी महिलाओं और जिंदगी को अपने बल बूते पर आसमान तक पहुंचाने की चाह रखने वाली युवतियों के लिए उदाहरण बनाना चाहती है।
 
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