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जानें, कैसे पत्थरबाजों पर नरमी सुरक्षाबलों पर पड़ रही है भारी?

Thu, 16 Feb 2017 02:47 PM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र,अमर उजाला/जम्मू
राघवेंद्र नारायण मिश्र,अमर उजाला/जम्मू Updated Thu, 16 Feb 2017 02:47 PM IST
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stone pelters becoming trouble for the security forces in kashmir
सुरक्षाबलों पर पथराव - फोटो : File Photo

कश्मीर में विश्वास बहाली के बहाने पत्थरबाजों के प्रति बरती जा रही नरमी सुरक्षा बलों पर भारी पड़ रही है। आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद पांच माह तक कश्मीर में उपद्रव के दौरान गिरफ्तार अधिकांश पत्थरबाज रिहा हो चुके हैं और कम उम्र के पत्थरबाजों से पीएसए हटाने का क्रम जारी है।

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कम उम्र के 4506 पत्थरबाजों से मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। इस बीच ताजा हिंसा में पत्थरबाजी से सुरक्षा बलों के 100 से अधिक जवान घायल हो चुके हैं। कुलगाम मुठभेड़ के बाद पत्थरबाजी का दौर फिर शुरू हो गया है।
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आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद पैदा हुए हिंसक माहौल जैसी स्थिति ने सुरक्षा बलों की परेशानी बढ़ा दी है। उधर अलगाववादियों ने 28 फरवरी तक के लिए विरोध प्रदर्शनों का नया कैलेंडर जारी कर दिया है।

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पत्थरबाजी के कारण 6 हजार से अधिक जवान घायल

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पत्थरबाजी के कारण 6 हजार से अधिक जवान घायल - फोटो : FILE PHOTO

आतंकी मुठभेड़, सीजफायर के उल्लंघन और आतंकी घटनाओं में पिछले चौदह महीनों में सेना और सुरक्षा बलों के 80 जवान शहीद हुए हैं। सीजफायर के उल्लंघन और और आतंकी घटनाओं में 150 जवान घायल हुए लेकिन पत्थरबाजी के कारण 6 हजार से अधिक जवान घायल हो चुके हैं।

इनमें से लगभग 700 विकलांग हो चुके हैं। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक प्रशासनिक स्तर पर वैसी ही गलतियां फिर से दोहराई जा रही हैं। आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद के शुरुआती दौर में विरोध प्रदर्शनों के दौरान नरमी बरती गई थी, जिसके कारण स्थिति बिगड़ी।

हिंसक माहौल ने आतंकियों को सुरक्षित स्थानों पर ठिकाना बनाने में मदद की। कुलगाम मुठभेड़ में स्थानीय आतंकियों की मौत के बाद हुर्रियत के कुलगाम चलो जैसे स्थिति बिगड़ने लगी है। 

300 सक्रिय आतंकियों ने ग्रामीण इलाकों में शरणस्थली बनाई

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स्कूल में आतंकी हमला - फोटो : social media

सुरक्षा एजेंसियों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट में फिर से उपद्रव का दौर शुरू होने की आशंका जताई है। अलगाववादी और आतंकी संगठन हिंसक माहौल पैदा कर पंचायत चुनाव को टलवाना चाहते हैं। जुलाई से दिसंबर 2016 के हिंसक माहौल के दौरान 300 सक्रिय आतंकियों ने ग्रामीण इलाकों में शरणस्थली बना ली है।

अब सर्च आपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों पर फायरिंग हो रही है और मुठभेड़ में स्थानीय आतंकियों की मौत के बाद सुरक्षा बलों को पत्थरों से निशाना बनाया जाने लगा है। कुलगाम मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों को लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल के आतंकियों ने एके-47 से शवों को सलामी देकर सुरक्षा बलों को चुनौती दी।

रियासत सरकार मारे गए पत्थरबाजों के परिवार को 5 लाख का मुआवजा और परिवार के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। हिंसा के दौरान गिरफ्तार 8587 लोगों में से 8473 के रिहा हो जाने के बाद पत्थरबाजों का मनोबल बढ़ा है। 

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