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श्रीनगर: शंकराचार्य जन्मोत्सव पर देशभर से जुटे साधु संतों ने लाल चौक पर लहराए भगवा ध्वज, मार्च निकाला

Wed, 26 Apr 2023 10:37 AM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Wed, 26 Apr 2023 10:37 AM IST
सार

देशभर से जुटे करीब 200 साधु-संतों ने शंकराचार्य मंदिर में विशेष हवन-पूजन किया। पूरा मंदिर परिसर तथा आसपास का इलाका हर हर महादेव के नारों से गूंजता रहा।

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Srinagar: Shankaracharya birth anniversary saints gathered from all over nation hoisted the saffron at Lal Cho
Srinagar - फोटो : संवाद

विस्तार

आदि शंकराचार्य के जन्मदिन पर मंगलवार को प्रसिद्ध लाल चौक पर देशभर से जुटे साधु संतों ने भगवा ध्वज लहराए। लाल चौक से टैगोर हॉल तक ध्वज के साथ मार्च निकाला। डल झील के किनारे पहाड़ी पर स्थित प्राचीन शंकराचार्य मंदिर में जन्मोत्सव मनाया गया। देशभर से जुटे करीब 200 साधु-संतों ने विशेष हवन-पूजन किया। पूरा मंदिर परिसर तथा आसपास का इलाका हर हर महादेव के नारों से गूंजता रहा।

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मार्च करने वाले संतों ने कहा कि हम सभी को यह संदेश देना चाहते हैं कि आपस में भाईचारा रखें, प्यार से रहें और भाईचारा बनाए रखें ।देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने और एक भारत सशक्त भारत की भावना के साथ श्रद्धालु इस समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर वन इंडिया स्ट्रांग इंडिया संस्था द्वारा भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। 
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प्रशासन ने भी अपनी तरफ से व्यापक तैयारियां की थीं।बंगलुरू से पहुंचे आयोजक पनींद्र बेल्लूर ने कहा, हमने यहां शंकराचार्य का जन्मोत्सव मनाने के साथ देश में शांति और खुशहाली के लिए प्रार्थना की है। लंगर भी लगाया। यह आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने यह भी कहा कि जब ट्रेन सीधी यहां पहुंचने लगेगी, तो देशभर के लोगों का कश्मीर आना और आसान हो जाएगा। 
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हम 10 साल से यहां शंकराचार्य का जन्मोत्सव मनाते आ रहे हैं। हम यहां आकर शांति और समृद्धि के लिए हवन करते हैं। महाराष्ट्र, कर्नाटक, बंगाल आदि जगहों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचे हैं। इसके अलावा कांची मठ से संत आए हैं। 

सुंदरबनी आश्रम से स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती भी पहुंचे, जिन्होंने पूजा-अर्चना की। इस वर्ष श्रीनगर में शृंगेरी मठ की स्थापना भी की जाएगी। एक संत गुरु ने कहा, आज अगर कश्मीर या दुनिया शांति की ओर अग्रसर है, तो उसका एक ही मतलब है कि वो अंधेरे की कीमत समझ चुके हैं।


पावन अवसर पर पहुंचना सौभाग्य की बात

समुद्र तल से 6095 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर की देखरेख धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा की जा रही है। शंकराचार्य के जन्मोत्सव पर मंदिर में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं के लिए सभी बुनियादी व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी। महाराष्ट्र से आए महेश ने कहा कि वह पहली बार आयोजन में शामिल हुए। अच्छा अनुभव रहा। हवन में आहुतियां डालने का मौका भी मिला। जम्मू से आए पंकज शर्मा ने कहा कि सुबह तीन बजे पूजा के साथ रुद्राभिषेक किया। यहां पावन अवसर पर पहुंचना सौभाग्य की बात है।

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