श्रीनगर: कांग्रेस के पूर्व विधायक भट की मानहानि का मामला खत्म करने की याचिका खारिज
कोर्ट ने कहा कि तथ्यों के आधार पर याचिका को आधारहीन पाया गया। इस वजह से इसे खारिज किया जाता है। अब ट्रायल कोर्ट मामले को कानून के अनुसार आगे बढ़ाएगा।
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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने मंगलवार को पूर्व कांग्रेस विधायक मोहम्मद अमीन भट द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। 2018 में अनंतनाग के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अनंतनाग के समक्ष पीडीपी के पूर्व नेता सरताज मदनी द्वारा उनके खिलाफ दायर मानहानि की शिकायत को रद्द करने की मांग की गई थी।
न्यायमूर्ति संजय धर की पीठ ने कहा, शिकायत में दिए गए वक्तव्य और उसके समर्थन में दिए गे साक्ष्य स्पष्ट रूप से याचिकाकर्ता (भट) के खिलाफ धारा 500 आरपीसी के तहत अपराध को पुख्ता करती है।
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अनंतनाग के मजिस्ट्रेट ने शिकायत के साथ-साथ शिकायतकर्ता और उसके गवाह के प्रारंभिक बयान पर अपने विवेकानुसार पाया कि धारा 500 आरपीसी के तहत भट द्वारा अपराध किया गया है, जिसके बाद उसके खिलाफ आगे की कार्रवाई की गई। इसलिए 20 अगस्त 2018 को जारी आदेश में कोई दोष नहीं। कोर्ट ने कहा कि तथ्यों के आधार पर याचिका को आधारहीन पाया गया। इस वजह से इसे खारिज किया जाता है। अब ट्रायल कोर्ट मामले को कानून के अनुसार आगे बढ़ाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री महबूब मुफ्ती के मामा मदनी ने 2018 में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अनंतनाग के समक्ष भट के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उस समय मदनी अनंतनाग के देवसर निर्वाचन क्षेत्र से तत्कालीन जम्मू-कश्मीर विधानसभा के सदस्य थे।
मदनी ने शिकायत में आरोप लगाया था कि 14 जुलाई 2018 को कांग्रेस विधायक मोहम्मद अमीन भट ने देवसर में और कुंड में जनसभाओं को संबोधित करते हुए आरोप लगाया था कि उन्होंने (मदनी ने) गरीबों को लूटकर 10000 करोड़ रुपये की संपत्ति जमा की और 40 लाख रुपये का कर्ज माफ कर दिया।
भट ने आरोप लगाए कि मदनी ने लरकीपोरा में मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए बिना किसी निविदा प्रक्रिया के अनंतनाग में अपने बेटे को 200 करोड़ रुपये की परियोजना का आवंटन सुनिश्चित किया और प्रत्येक नियुक्ति के लिए 10 लाख रुपये की रिश्वत भी ली। जेएंडके बैंक को इसके अलावा हर अधिकारी से एक करोड़ रुपये की राशि मिली और मदनी ने चंडीगढ़, दिल्ली, जम्मू, पहलगाम व बिहार में संपत्ति जमा की है।