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Jammu News: डॉ. फारूक ने महात्मा गांधी व लाल बहादुर शास्त्री को दी श्रद्धांजलि
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संवाद न्यूज़ एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू और कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने वीरवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और भारत की आजादी, एकता और प्रगति में उनके असाधारण योगदान को याद किया।
डॉ. फारूक ने कहा कि महात्मा गांधी का सत्य, अहिंसा और सांप्रदायिक सौहार्द का दर्शन दुनिया भर में पीढ़ियों को प्रेरित करता रहा है। उन्होंने कहा कि गांधीजी का अहिंसा और धर्मनिरपेक्षता के प्रति अटूट समर्पण हमारे लोकतांत्रिक गणराज्य की नैतिक नींव बना। ऐसे समय में जब विभाजनकारी ताकतें देश के सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं। गांधीजी का शांति, सहिष्णुता और समावेशी राष्ट्रवाद का संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है।
उन्होंने युवाओं से गांधी के जीवन और शिक्षाओं का गहराई से अध्ययन करने का आग्रह किया। कहा कि आइए हम व्यक्तिगत आचरण और सार्वजनिक जीवन में गांधीवादी आदर्शों को बनाए रखने की अपनी प्रतिज्ञा को नवीनीकृत करें। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को याद करते हुए डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने उनकी विनम्रता, साहस और आम आदमी के प्रति समर्पण की सराहना की।
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उन्होंने कहा कि शास्त्री एक महान नैतिक शक्ति वाले राजनेता थे, जिन्होंने अत्यंत चुनौतीपूर्ण समय में देश का नेतृत्व किया। उनका प्रसिद्ध नारा जय जवान-जय किसान आज भी भारत की भावना के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने किसानों और सैनिकों के अधिकारों की वकालत की और शांति व सामाजिक समानता के लिए अथक प्रयास किया।”
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श्रीनगर। जम्मू और कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने वीरवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और भारत की आजादी, एकता और प्रगति में उनके असाधारण योगदान को याद किया।
डॉ. फारूक ने कहा कि महात्मा गांधी का सत्य, अहिंसा और सांप्रदायिक सौहार्द का दर्शन दुनिया भर में पीढ़ियों को प्रेरित करता रहा है। उन्होंने कहा कि गांधीजी का अहिंसा और धर्मनिरपेक्षता के प्रति अटूट समर्पण हमारे लोकतांत्रिक गणराज्य की नैतिक नींव बना। ऐसे समय में जब विभाजनकारी ताकतें देश के सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं। गांधीजी का शांति, सहिष्णुता और समावेशी राष्ट्रवाद का संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है।
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उन्होंने युवाओं से गांधी के जीवन और शिक्षाओं का गहराई से अध्ययन करने का आग्रह किया। कहा कि आइए हम व्यक्तिगत आचरण और सार्वजनिक जीवन में गांधीवादी आदर्शों को बनाए रखने की अपनी प्रतिज्ञा को नवीनीकृत करें। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को याद करते हुए डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने उनकी विनम्रता, साहस और आम आदमी के प्रति समर्पण की सराहना की।
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उन्होंने कहा कि शास्त्री एक महान नैतिक शक्ति वाले राजनेता थे, जिन्होंने अत्यंत चुनौतीपूर्ण समय में देश का नेतृत्व किया। उनका प्रसिद्ध नारा जय जवान-जय किसान आज भी भारत की भावना के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने किसानों और सैनिकों के अधिकारों की वकालत की और शांति व सामाजिक समानता के लिए अथक प्रयास किया।”